एक ओर स्वास्थ्य विभाग में लगातार दवाओं की कमी की बात कही जा रही है तो दूसरी ओर शहर के दो सरकारी अस्पतालों (डीडी अस्पताल और मलखान सिंह जिला अस्पताल) में करीब दो करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। जनता की शिकायत पर भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने इस मामले का विवरण जुटा कर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह को भेजने की तैयारी की है। एक प्रति सीएम को भी भेजी जा रही है।
इस पूरे प्रकरण पर राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने बताया कि एक ओर मुख्यमंत्री योगी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर करने की बात कह रहे हैं, लेकिन पिछले एक महीने में मैंने स्वास्थ्य विभाग की जो तस्वीर देखी और महसूस की है वह बहुत ही निराशा जनक है। अस्पतालों के प्रशासक अपनी मानसिकता और कार्यशैली बदलने को तैयार नहीं है। दीन दयाल अस्पताल में मार्च महीने में प्रदेश के रेट कांट्रैक्ट के तहत एक करोड़ रुपये की दवाएं खरीदी गईं।
आरोप है कि इसके लिए पांच फीसदी कमीशन दवा कंपनी को दिया गया। इस कमीशन की भरपाई करने के लिए दवा कम ली गई और बिल ज्यादा राशि के लिए गए। दवाओं की आपूर्ति के बाद उनका वितरण तो दूर उन्हें बेहद खराब तरीके से स्टोर किया गया। दवाओं पर सरकारी मुहर (नाट फार सेल) भी नहीं लगायी जा रही है। दोनों अस्पतालों में 15 दिन से एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। निरीक्षण में पाया गया कि जननी सुरक्षा योजना का रिकार्ड भी ठीक से नहीं रखा जा रहा है। इन्हीं सब तथ्यों को जुटाकर स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष रखा जा रहा है। राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने कहा कि गत दिनों जब व मलखान सिंह जिला अस्पताल गए तो पाया कि यहां पर एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं हैं। मरीजों से बाहर से खरीदने के लिए कहा जा रहा है। जिसकी कीमत 300 रुपये है। उसे लगाने के भी 10 रुपये अस्पताल में लिए जा रहे हैं। इसका भी जिक्र पत्र में कर दिया है। मलखान सिंह जिला अस्पताल में भी लोकल पर्चेजिंग का 80 लाख रुपये का भुगतान रुका हुआ है, जो खरीद के नियम हैं वह ताक पर रखकर मन मर्जी से काम किया गया है। इनकी गंभीरता से जांच की जरूरत है।
पुराना पेमेंट ही हम लोग कर रहे हैं। हमारे पास तो वैसे ही बजट का अभाव है। जो भी कमी दवाओं के वितरण में सामने आयी है उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जहां तक लोकल पर्चेजिंग की पेंडिंग है तो वह पूरे कागज देखकर ही बतायी जा सकती है।
- डॉ. याचना शर्मा, सीएमएस, डीडी अस्पताल
मेरे पास अभी तो ऐसा कोई पत्र नहीं आया है अगर आएगा तो विभागीय नियम हैं उसके अनुसार कार्यवाही होगी। मैं लगातार दो दिन से दवाओं का स्टाक और स्थिति को चेक कर रही हूं। कुछ गड़बड़ियां मिली हैं जिसके लिए निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. गीता प्रधान, एडी हेल्थ
दवाओं पर मुहर क्यों जरूरी है
प्रदेश सरकार द्वारा निश्चित कंपनियों से खरीद का अनुबंध किया जाता है। दवा अस्पताल पहुंचने पर उस पर बिक्री के लिए नहीं, अस्पताल के लिए नि:शुल्क आदि की मुहर लगा दी जाती है, जिससे वह खुले बाजार में नहीं बिक सके। मुहर न होने का मतलब है कि दवाओं की खपत अस्पताल में नहीं होकर कहीं और हो रही है और उसके बदले हित पूर्ति हो रही है।