त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ड्यूटी ने परिवार का सहारा छीन लिया। यह आरोप स्वजन ने लगाया है। यदि वह पंचायत चुनाव के लिए होने वाले प्रशिक्षण में शामिल न होते तो उनके खोने के दर्द से दो-चार न होना पड़ता। बहरहाल, अब सरकार से यही फरियाद है कि वह मुआवजा व नौकरी की मुराद पूरी कर दे। सुहाग व खून के रिश्ते को खोने वाले परिजनों के दिल में दर्द का सैलाब है।
चुनाव प्रशिक्षण में हुए थे शामिल, कोरोना को नहीं दे सके मात
मृतक परमवीर की पत्नी अरुणा चौधरी ने बताया कि उनके पति विकास खंड गोंडा के प्राथमिक विद्यालय भूरिया की गढ़ी में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात थे। उन्होंने पंचायत चुनाव के लिए कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल में प्रशिक्षण लिया था। प्रशिक्षण के बाद 16 अप्रैल को उन्हें बुखार आ गया। एक निजी डॉक्टर से उन्होंने दवा भी ली थी। डॉक्टर ने उन्हें वायरल बताया। फिर, उनसे दवा लेते रहे। बाद में डॉक्टर के कहने पर टाइफायड की जांच कराई, लेकिन रिपोर्ट में कुछ नहीं मिला। इसके बाद डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने के लिए कहा, जब उन्होंने सीटी स्कैन कराया, तो उसमें कोविड-19 संक्रमण निकला। अरुणा ने कहा कि इसी बीच पति की हालत बिगड़ती जा रही थी, तब 23 अप्रैल को पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में उन्हें भर्ती कराया, जहां वह 29 अप्रैल को मौत से हार गए। बिहारीपुरम मेलरोज बाईपास निवासी अरुणा ने कहा कि पति की मौत से परिवार का सहारा छिन गया। दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया हट गया। परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नौकरी व मुआवजा मिलने से परिवार का भरण-पोषण आसानी से हो सकेगा।
मृतक सुमन की छोटी बहन निशा बताया कि दीदी ने पंचायत चुनाव के लिए कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल में प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्हें बुखार आ गया। इसकी जानकारी उन्हें फोन पर दी। 16 अप्रैल को वह दिल्ली स्थित घर आ गईं। दीदी ने कहा उन्हें जुकाम हो गया। 17 अप्रैल को दीदी का आरटीपीसीआर कराया गया, लेकिन रिपोर्ट बाद में पॉजिटिव आई। इसी बीच डॉक्टर ने कोविड-19 की दवा लिख दी। बाजार में एक दवा नहीं मिल पाई। 20 अप्रैल को उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया। डॉक्टर ने उन्हें हॉस्पिटल में फौरन एडमिट कराने के लिए कहा, क्योंकि उनकी हालत चिंताजनक थी। डॉक्टर के कहने पर उन्हें भर्ती करा दिया गया। मगर, उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। ऑक्सीजन लेवल लगातार नीचे जा रहा था। 11 मई की रात को वेंटिलेटर पर रख दिया गया, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो पा रहा था। 12 मई की सुबह 9:30 बजे दीदी ने दम तोड़ दिया। निशा ने कहा कि सरकार को चुनाव में भेजना ही था तो टीकाकरण कराकर भेजना चाहिए था। दीदी अब इस दुनिया में नहीं हैं, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है। सरकार को मुआवजा देना चाहिए।
मृतक शिक्षकों के परिजनों को नौकरी मिले : मनोज
अलीगढ़। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव मनोज सक्सेना ने प्रदेश सरकार से मृतक शिक्षकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों के प्रति चिंतित नहीं है। मनोज ने कहा कि मृतक शिक्षक के परिवार को पेंशन दे। साथ ही उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का ख्याल भी रखे।
मृतक शिक्षकों के परिजन शिक्षक संघ के संपर्क में
अलीगढ़। पंचायत चुनाव ड्यूटी की वजह कोरोना के शिकार शिक्षकों के परिजन उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री मुकेश कुमार सिंह के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि लगातार मृतक शिक्षक-शिक्षिकाओं के परिजन उनसे संपर्क करके सलाह-मशविरा ले रहे हैं। मुकेश कुमार ने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में दिवंगत शिक्षकों के परिजनों के साथ उनकी सहानुभूति है। उन्हें हरसंभव मदद करेंगे।