केस 1
बीती 23 अक्तूबर को नितिन गुप्ता गूगल मैप के सहारे दिल्ली से अलीगढ़ का सफर कर रहे थे। इस दौरान गूगल मैप ने गभाना के पास उनको रास्ता घुमा दिया। किसी खेत की ओर ले गया। मार्ग से अंजान होने की वजह से नितिन कुछ समझ नहीं पाए। स्थानीय व्यक्ति की मदद के सहारे वह अपने गंतव्य तक पहुंच सके। वह दिल्ली से अलीगढ़ अपनी रिश्तेदारी में आए थे।
केस 2
बीते सप्ताह केशव वर्मा गूगल मैप के सहारे अलीगढ़ से दिल्ली जा रहे थे। बीच में गूगल ने उनको नया रास्ता दिखाया। वह भी नए रास्ते पर चल दिए। तकरीबन एक घंटा चलने के बाद कच्चे रास्ते पर पहुंच गए। रात का समय था, कोई भी दुर्घटना हो सकती थी। जैसे-तैसे वह मुख्य मार्ग तक पहुंचे। जहां से स्थानीय लोगों की सहायता लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचे।
स्थानीय लोगों से भी जानकारी करें
लंबे समय से गूगल मैप का इस्तेमाल करने से लोगों में उसके प्रति विश्वास बन गया है। ऐसे में अक्सर लोग सेटेलाइट व्यू देखकर सफर तय करते हैं। जानकार कहते हैं कि सेटेलाइट व्यू के बजाय स्ट्रीट व्यू का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे सटीक जानकारी मिलने की संभावनाएं बढ़ जातीं हैं। अनजान रास्तों पर सफर करते समय स्थानीय लोगों से जानकारी लें, इससे भ्रम की स्थिति दूर होती है। सेटेलाइट व्यू में मार्गों को स्पष्ट नहीं देखा सकता है। स्ट्रीट व्यू से ज्यादा सटीक जानकारी मिल जाती है।
यह बरतें सावधानी
- गूगल मैप एप को अपडेट करते रहें।
- सेटेलाइट व्यू की जगह स्ट्रीट व्यू का इस्तेमाल करें।
- स्थानीय लोगों से जानकारी को पुख्ता कर लें।
- सफर से पूर्व स्ट्रीट व्यू ऑन करें, क्योंकि यह अधिक समय लेता है।