इस बार श्राद्ध पक्ष 16 दिन की जगह 15 दिन ही रहेंगे। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। पितर पक्ष शुरू होते ही सभी शुभ कामों पर ब्रेक लगा जाएगा। गुुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि अगर किसी मनुष्य का विधि पूर्वक श्राद्ध और तर्पण न किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती है। श्राद्ध पक्ष 16 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष, पितृ पक्ष रहेगा। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध का कम होना और नवरात्र तिथि का बढ़ना शुभ माना जाता है।
प्रतिपदा- इस तिथि को नाना-नानी का श्राद्ध करना उत्तम
पंचमी- जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, उनका श्राद्ध पंचमी को करना
नवमी- सुहागिन स्त्रियों और मां का श्राद्ध किया जाता है।
एकादशी- सन्यासी लोगाें का श्राद्ध किया जाता है
त्रयोदशी- छोटे बच्चाें ‘कुवारों’ का श्राद्ध किया जाता है
चतुदर्र्शी- आत्महत्या, जहर और दुर्घटना यानी अकाल मौत वालों श्राद्ध किया जाता है।
अमावस्या- किसी कारण से पितृ की अन्य तिथियों पर पितरों का श्राद्ध करने से चुक गए हो या तिथि याद न हो तो इस तिथि पर श्राद्ध किए जा सकते हैं।