अनूप शहर रोड पर आकाशवाणी केंद्र की जगह पर बनी अस्थायी गोशाल में पेड़ के नीचे बैठे गोवंश।
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अनूपशहर रोड स्थित जवां के गांव सुढि़याल में आकाशवाणी केंद्र की 6500 बीघा जमीन पर अस्थायी गोशाला संचालित है, जिसमें लगभग 750 से अधिक गोवंश हैं। सभी गोवंश तपती धूप में बबूल के पेड़ों की छांव के सहारे रहते हैं, अगर बारिश हो जाए तो इसी परिसर में बने पुराने जर्जर गोदामों में पहुंचा दिए जाते हैं। चारे की व्यवस्था हर महीने उधार में होती है।
किसानों से हरा चारा, सब्जी और भूसा लिया जाता है, जिसका भुगतान एक महीने बाद होता है। यह भुगतान उस धनराशि से होता है, जो पशुपालन विभाग की ओर से प्रति गोवंश रोजाना की दर से दी जाती है।
अनूपशहर रोड पर स्थित इस बेशकीमती जमीन का स्वामित्व आकाशवाणी केंद्र के पास है, यहां पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। इसलिए यहां आज तक टिनशेड नहीं बन सका है। सभी झुंड में पेड़ों के नीचे रहते हैं, जब चारे की गाड़ी आती है तो उसके पीछे भाग पड़ते हैं। दिन भर में कई बार यही सिलसिला चलता है। यहां गोवंश के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
कुछ किसान अपनी इच्छा से भी भूसा, हरा चारा और सब्जियां दे जाते हैं। पानी की नाद को महीनों बाद साफ किया जाता है। देखरेख करने वाले राहुल ने बताया कि टिनशेड बनवाने के लिए दिल्ली तक भागदौड़ की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि इस गोशाला में अस्थायी छाया करने का इंतजाम करने का प्रयास किया जाएगा। अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त कराई जाएंगी।