सुनने और पढ़ने में अटपटा लगेगा, लेकिन काला महल में अदियान और सुल्तान नाम के बकरे बड़े ही शानो-शौकत से रहते हैं। इन बकरों की कुर्बानी ईदु-उल-अजहा (दो सितंबर) के मौके पर दी जाएगी।
मोहल्ला काला महल के लोग बकरा पालने शौकीन हैं, वह भी आला नस्ल का।
जिस तरह सेहतमंद शख्स अपनी डाइटिंग शेड्यूल बनाकर रखता है, वैसे ही इन वजनदार और सुंदर बकरों के लिए भी डाइटिंग शेड्यूल तय है। सुल्तान (बकरा) को सुबह 200 ग्राम मक्खन, चना, पत्ता, सेब दिया जाता है। वहीं दोपहर को पत्ता बिना डंठल दो किलोग्राम, डेढ़ लीटर दूध दिया जाता है।
शाम को पत्ता व चना दिया जाता है, जिसमें 700 रुपये किलो वाली मसालेदार दाल, 50 ग्राम मिलाकर खिलाई जाती है। ये बकरे कूलर और पंखे के बगैर नहीं रह सकते। इनका वजन 100 किलो से ज्यादा है। ये बकरे कोल्ड ड्रिंक भी बड़े ही मजे से गटकते हैं। एक बकरे की कीमत एक से डेढ़ लाख रुपये आंकी गई है।
हमें बकरे पालने का शौक है। वह सुंदर और तंदुरुस्त दिखे, इसके लिए उसके खानपान पर ज्यादा जोर होता है। जरूरत पड़ने पर उसे दवाएं भी दी जाती हैं, ताकि वह फिट रह सके। - मोहम्मद मुबीन, काला महल
मेरा नाम अदनान है, इसलिए अपने बकरे का नाम अदियान रख दिया। ज्यादातर बकरा घर पर ही पंखे की हवा में रहता है। उसके खानपान को लेकर घर के लोग संजीदा रहते हैं। - अदनान, काला महल
चुलबुल-बुलबुल, गुड्डा बकरे तोतापरी नस्ल के हैं। उनके खानपान पर खास तवज्जो दी जाती है, जिससे बकरे मजबूत व वजनदार होते हैं। पिछले साल मैंने तीन लाख रुपये के दो बकरे बेचे थे। - उमरदराज, काला महल