सुमन कनोजिया, डीएसपी, गभाना
आज एक सम्मानित पद पर हैं जो कभी एक साधारण महिला हुआ करती थी। सुमन कनोजिया अलीगढ़ की डीएसपी हैं, यह गभाना में कार्यरत हैं। इनकी एक बेटी ईशानी और बेटा अद्यांत है। वकालत पढ़ी, दंत चिकित्सक के लिए सिलेक्शन भी हुआ, पर बचपन से पापा की वर्दी देखकर उन्हें भी वर्दी पहनने का ही शौक था। उन्होंने भी यूपीएससी की तैयारी की और आज इस मुकाम पर हैं। इन्होंने अपने काम को सबसे पहले मान्यता दी है। डिलीवरी के एक दिन पहले तक काम करना मेरे लिए गर्व की बात थी। अचानक से कभी-कभी रात में जाना होता है तो बेटा हर रोज थोड़ी-थोड़ी देर पर उठकर देखाता है की मां है या नहीं।
तूलिका अग्रवाल, महिला मोर्चा अध्यक्ष और मक्खनलाल नन्नुमल देसी घी विक्रेता
-महावीरगंज में देशी घी विक्रेता मक्खनलाल नन्नूमल वालों के यहां पहली बार महिलाओं में कदम आगे बढ़ाने वाली तूलिका अग्रवाल समाज के साथ-साथ परिवार को भी लेकर चलती हैं। इनके कुंदन और क्षितिज नाम के दो बेटे हैं। जिन्हें पेशा लड़कियों की कद्र करना सिखाया है। जब यह पहली बार दुकान पर पहुंची तो लोग आश्चर्य चकित हो उठे। प्रसाद ससुर और पति ने पूरा सहयोग किया। तूलिका अग्रवाल जी बीजेपी की महिला मोर्चा उपाध्यक्ष भी हैं।
मीनाक्षी गौड़, वेट लिफ्टिंग कोच, अहिल्या बाई स्टेडियम
जिस वक्त महिलाओं को पीछे घसीटा जाता था, उसे वक्त में इनके पिता ने इन्हें वेट लिफ्टिंग जैसा खेल सिखाया और उसमें राष्ट्रीय अवार्ड तक सफर भी कराया। मेरे पिता नत्थू लाल गौड़ दारा सिंह के साथ कुश्ती खेला करते थे। शादी के बाद खेलना बंद हो गया। कुछ मजबूरी की वजह से लोगों के घर में बर्तन भी धुले। मेडल लाने के बाद भी नौकरी के लिए बहुत भटकना पड़ा। इनके दो बच्चे हैं बेटा बेटी दोनों ही वेट लिफ्टिंग करते हैं। बेटा राज्य स्तर पर व बेटी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी है। यह आज 52 की उम्र में भी ओलंपिक खेलने की इच्छा रखती है। आगे चल कर खेलो इंडिया खेलों के तहत एक वेट लिफ्टिंग कोचिंग सेंटर खोलना चाहती हैं। बस सरकार की मंजूरी इंतजार है।
ज्योति मित्तल, इनर व्हील अलीगढ़, जिला आईएसओ
दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढने वाली महिला डॉक्टर बनना चाहती थी। कुछ कारणवश उनका सपना पूरा ना हो सका। अब वह समाज सेविका बनाकर लोगों की सहायता बढ़ चढ़कर करती हैं। इनके दो बेटे हैं एक का नाम शिवम और दूसरे का आदित्य है। बेटों और पत्ती की हर छोटी बड़ी चीज का ध्यान रखना इन्हें खूब भाता है। की खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढती हैं। यह ऐसी कई संस्थानों से जुड़ी हैं जो जरूरतमंदों को मुफ्त में सहायता देती हैं।