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Mother's Day 2023: कहीं चले जाओ, पर साथ रहेगी मां की ममता भरी छांव

Sun, 14 May 2023 03:34 AM IST
चमन शर्मा सृष्टि मिश्रा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

एक अकेली मां बहुत से किरदार निभाती है। जैसे - प्रथम ईश्वर, शिक्षक, दार्शनिक, मार्गदर्शक, मित्र इत्यादि। दुनिया न जाने कहां से कहां हो गई पर एक मां है वह जैसी प्राचीन में थी वर्तमान में भी वैसी ही है। कभी भी मां जैसी शब्द का वर्णन करना कुछ शब्दों में बहुत मुश्किल होता है। 
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मदर्स डे - फोटो : pexel
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विस्तार
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जहां जाइएगा वहीं पाइयेगा, यह पंक्ति मां की परवाह के लिए बिलकुल फिट बैठती है। आप कितना ही दूर क्यों न चले जाइये, मां की ममता हर जगह आपके साथ होती है। खाना खाया या नहीं, ख्याल रख रहे हो या नहीं; यह सिर्फ वही पूछती हैं। एक अकेली मां बहुत से किरदार निभाती है। जैसे - प्रथम ईश्वर, शिक्षक, दार्शनिक, मार्गदर्शक, मित्र इत्यादि। दुनिया न जाने कहां से कहां हो गई पर एक मां है वह जैसी प्राचीन में थी वर्तमान में भी वैसी ही है। कभी भी मां जैसी शब्द का वर्णन करना कुछ शब्दों में बहुत मुश्किल होता है। 

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एक मां में सारा जहां बसता है। उसकी ममता अनमोल है स्वयं मां भी। जैसे कुम्हार से घड़े को ठोक पीट कर और तपाकर उत्तम बनाता है, तो बस कुम्हार मां है और कच्चा घड़ा संतान। मां सभी की कमी पूरी कर सकती है, पर मां की कमी शायद ही कोई पूरी कर पाया हो। औलाद के प्रति किए गए का आजतक कोई भी मोल नहीं चुका पाया है। अगर ठीक तरह से सोचें तो उसे क्या ही मिलता है, मां बनकर! बच्चे द्वारा गीला बिस्तर, गंदी और बदबूदार साड़ी, जगह जगह फैली गंदगी, झूंठा बचा हुआ खाना ऐसी ही बहुत सी चीजें। मां अपने किए का कभी भी हिसाब नहीं मांगती। मां का होना सबसे बड़ा आशीर्वाद, उसका खोना श्राप।

“मां वह एक ऐसी समस्या है, जिसका हाल दूसरों के पास नहीं होता।” यह पंक्ति हरिवंश राय बच्चन जी की है। उनके मां को समस्या कहने के पीछे एक बहुत ही बड़ा अर्थ छुपा हुआ है। मां वह एक ऐसी समस्या है जो बहुत से लोगों के जीवन में देखी जाती है। यह समस्या उन लोगों के लिए अधिक आम होती है जो घर के साथ-साथ समाज में भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अपना समय देते हैं। उन्होंने इस पंक्ति में मां होने की जिम्मेदारियां को मां की समस्या बताया है। बच्चों का पालन पोषण घर की बाकी जिम्मेदारियां और साथ ही जब वह समझ में अपना एक अलग नाम आ
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बनाती हैं। बहुत से लोगों के मुंह से आपने सुना होगा की औरत आखिर दिनभर करती क्या है? सिर्फ सोती है वह। अब आप शायद समझ ही गए होंगे की यही है समस्या। बच्चे को जन्म भी देती है मां उसे पालती भी है। घर के सारे काम, सभी जनों का ख्याल रखना, साथ ही अपनी पहचान बनाने के लिए भी जी तोड़ मेहनत करना। ऐसी ही कुछ हस्तियों से हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं।

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सुमन कनोजिया, डीएसपी, गभाना
आज एक सम्मानित पद पर हैं जो कभी एक साधारण महिला हुआ करती थी। सुमन कनोजिया अलीगढ़ की डीएसपी हैं, यह गभाना में कार्यरत हैं। इनकी एक बेटी ईशानी और बेटा अद्यांत है। वकालत पढ़ी, दंत चिकित्सक के लिए सिलेक्शन भी हुआ, पर बचपन से पापा की वर्दी देखकर उन्हें भी वर्दी पहनने का ही शौक था। उन्होंने भी यूपीएससी की तैयारी की और आज इस मुकाम पर हैं। इन्होंने अपने काम को सबसे पहले मान्यता दी है। डिलीवरी के एक दिन पहले तक काम करना मेरे लिए गर्व की बात थी। अचानक से कभी-कभी रात में जाना होता है तो बेटा हर रोज थोड़ी-थोड़ी देर पर उठकर देखाता है की मां है या नहीं। 

तूलिका अग्रवाल, महिला मोर्चा अध्यक्ष और मक्खनलाल नन्नुमल देसी घी विक्रेता
-महावीरगंज में देशी घी विक्रेता मक्खनलाल नन्नूमल वालों के यहां पहली बार महिलाओं में कदम आगे बढ़ाने वाली तूलिका अग्रवाल समाज के साथ-साथ परिवार को भी लेकर चलती हैं। इनके कुंदन और क्षितिज नाम के दो बेटे हैं। जिन्हें पेशा लड़कियों की कद्र करना सिखाया है। जब यह पहली बार दुकान पर पहुंची तो लोग आश्चर्य चकित हो उठे। प्रसाद ससुर और पति ने पूरा सहयोग किया। तूलिका अग्रवाल जी बीजेपी की महिला मोर्चा उपाध्यक्ष भी हैं।

मीनाक्षी गौड़, वेट लिफ्टिंग कोच, अहिल्या बाई स्टेडियम
जिस वक्त महिलाओं को पीछे घसीटा जाता था, उसे वक्त में इनके पिता ने इन्हें वेट लिफ्टिंग जैसा खेल सिखाया और उसमें राष्ट्रीय अवार्ड तक सफर भी कराया। मेरे पिता नत्थू लाल गौड़ दारा सिंह के साथ कुश्ती खेला करते थे। शादी के बाद खेलना बंद हो गया। कुछ मजबूरी की वजह से लोगों के घर में बर्तन भी धुले। मेडल लाने के बाद भी नौकरी के लिए बहुत भटकना पड़ा। इनके दो बच्चे हैं बेटा बेटी दोनों ही वेट लिफ्टिंग करते हैं। बेटा राज्य स्तर पर व बेटी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी है। यह आज 52 की उम्र में भी ओलंपिक खेलने की इच्छा रखती है। आगे चल कर खेलो इंडिया खेलों के तहत एक वेट लिफ्टिंग कोचिंग सेंटर खोलना चाहती हैं। बस सरकार की मंजूरी इंतजार है।

ज्योति मित्तल, इनर व्हील अलीगढ़, जिला आईएसओ
दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढने वाली महिला डॉक्टर बनना चाहती थी। कुछ कारणवश उनका सपना पूरा ना हो सका। अब वह समाज सेविका बनाकर लोगों की सहायता बढ़ चढ़कर करती हैं। इनके दो बेटे हैं एक का नाम शिवम और दूसरे का आदित्य है। बेटों और पत्ती की हर छोटी बड़ी चीज का ध्यान रखना इन्हें खूब भाता है। की खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढती हैं। यह ऐसी कई संस्थानों से जुड़ी हैं जो जरूरतमंदों को मुफ्त में सहायता देती हैं। 


 
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