21 नवंबर को सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा का जब परिणाम जारी हुआ तो अर्राना गांव में भी खुशियां मनाई गईं। बात थी भी खुशी की। इस गांव की बिटिया ममता ने परीक्षा पास कर ली थी। यूं कहिए कि वर्दी उससे बस एक कदम दूर रह गई थी। शारीरिक परीक्षा में केवल दौड़ होनी थी जिसकी तैयारी ममता पूरी मेहनत से कर रही थी। लेकिन 22 नवंबर को गांव के मैदान पर दौड़ते दौड़ते तबीयत बिगड़ी और गश खाकर गिर पड़ी। परिवार वाले लेकर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। ममता की मौत से परिवार वालों के बेटी को वर्दी में देखने के ख्वाब भी चकनाचूर हो गए।
अर्राना गांव के विक्रम सिंह किसान हैं। धरती का सीना चीरकर अन्न उगाते हैं। उनके चार बेटियां और एक बेटा है। दो बड़ी बेटियों को शादी हो चुकी है जबकि दो छोटी कृष्णा और ममता काफी समय से पुलिस भर्ती के लिए तैयारी कर रही हैं। ममता ने अगस्त माह में नागरिक पुलिस भर्ती के लिए लिखित परीक्षा दी थी। 21 नवंबर को परिणाम जारी हुआ था। ममता ने इस परीक्षा को अच्छे नंबरों से पास कर लिया था। जिस दिन परिणाम आया था घर वाले बेहद खुश थे।
पिता विक्रम सिंह और मां राजवती ने पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी थी। क्योंकि अगले माह शारीरिक परीक्षा होनी है लिहाजा ममता उसी की तैयारी कर रही थी। गांव में एक खेत में बने मैदान में वह हर रोज सुबह को दौड़ने के लिए जाती थी। सुबह को पांच बजे वह दौड़ने के लिए घर से निकली थी। लेकिन आज यहां दौड़ते दौड़ते हार्ट अटैक आ गया। क्योंकि कृष्णा भी साथ में ही थी लिहाजा उसने तुरंत शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा कर लिया। परिवार वाले भी पहुंच गए। अलीगढ़ मेडिकल कालेज तक आए मगर यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मां, देखना एक दिन पुलिस अफसर बनूंगी
ममता का ख्वाब पुलिस अधिकारी बनने का था। वह चाहती थी कि सिपाही बन जाऊं फिर आगे दरोगा की तैयारी करूंगी। परिवार वालों ने बताया कि बड़ी मेहनत कर रही थी हमारी बेटी। अब जब वर्दी मिलने का समय करीब आया तो उसे हमसे छीन लिया गया। ममता के चाचा पूर्व प्रधान हम्बीर सिंह ने बताया कि यूपी पुलिस की लिखित परीक्षा का परिणाम आने के बाद से सभी खुश थे। सभी को उम्मीद थी कि ममता का सिपाही के पद पर चयन हो जाएगा। जिस तरह से वह तैयारी कर रही थी उससे लगता था कि वह आगे भी दूसरी परिक्षाओं को पास कर लेगी।