जन्म देने के लिये मां, राखी बांधने के लिए बहन चाहिए। साथ निभाने के लिए पत्नी, कहानी सुनाने के लिए दादी और नानी चाहिए लेकिन यह रिश्ते निभाने के लिए बेटी जिंदा रहनी चाहिए।
अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत ग्रीन वैली कान्वेंट स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में यह भाव रीतू गर्ग ने कविता के माध्यम से व्यक्त किए।
प्रधानाचार्य खुशबू गुप्ता ने कहा कि परिवार में बेटी न हो तो भइया दूज, रक्षाबंधन का मतलब ही समाप्त हो जाता है। बेटियों को जन्म देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं। वंदना गुप्ता ने कहा कि बेटियां नहीं होती तो लक्ष्मीबाई कहां से आती? फाइटर प्लेन उड़ाकर बेटियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है।
डॉ. क्षेमवीर गुप्ता ने कहा कि ‘अमर उजाला’ का प्रयास बेटियों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहा है। समाज में महत्वपूर्ण संदेश भेजने का काम कर रहा है। बेटा चाहिए तो वह भी बेटी के बगैर नहीं मिलता।
अंशिका गुप्ता, श्वेता माहेश्वरी, अंजलि माहेश्वरी ने भी संबोधित किया। संचालन पारुल वार्ष्णेय ने किया। गरिमा सोनी, स्तुति गुप्ता, विवेक राजपूत, धवलपाल सिंह, दीक्षा माहेश्वरी, पिंकी श्रीवास्तव, मोहित शर्मा, वंशिका गुप्ता, पूनम, माही शर्मा मौजूद रहे।
अपराजिता के कार्यक्रम में मौजूद बच्चे।- फोटो : CHHARRA