मोबाइल पर गेम खेलते-खेलते साढ़े तीन साल की बच्ची घर में सोफे के पीछे छिप गई। काफी देर तक उसके न दिखने पर परिजन परेशान हो गए। करीब साढ़े तीन घंटे तक इधर-उधर ढूंढने के बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस घर पर पहुंची और शोरशराबा होने लगा, तब बच्ची सामने आकर बोली, ‘आप मुझे ढूंढ नहीं पाए, मैं जीत गई और आप लोग हार गए’।
महानगर के आईटीआई रोड स्थित रहने वाले एक व्यक्ति की साढ़े तीन साल की बच्ची रविवार को मोबाइल पर हिडन गेम (लुका-छिपी खेल) खेल रही थी। गेम में मिल रहे दिशा-निर्देश पर वह दोपहर 12:45 बजे सोफे के पीछे छिप गई। एक-डेढ़ घंटे के बाद जब वह नहीं दिखी तो परिजन परेशान हो गए। उसे आसपास ढूंढा फिर भी बच्ची नहीं मिली। इसके बाद परिजनों ने दोपहर 3:30 बजे पुलिस को सूचना दे दी।
कुछ देर में पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस परिजनों से जानकारी ले ही रही थी। वहीं, बच्ची की मां व अन्य परिजनों के रोने की आवाज पर सोफे के पीछे छिपी बच्ची बाहर आकर बोली- ‘आप मुझे ढूंढ नहीं पाए, मैं जीत गई और आप लोग हार गए’। बच्ची के मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। पुलिस ने परिजनों को बच्ची पर ध्यान देने की नसीहत देकर वापस आ गई।
मोबाइल गेम खेलने के दौरान छिपकर बच्ची ने सबको परेशान कर दिया, लेकिन वह सिर्फ साढ़े तीन साल की है, उसे गलत-सही का कुछ पता नहीं है, बल्कि इसके लिए परिजन स्वयं जिम्मेदार हैं। समाज में ऐसी परिपाटी चल पड़ी कि उनका छोटा सा बच्चा मोबाइल पर सारे एप्लीकेशन को बड़ों जैसा चलाता है, जो बच्चों और परिजन के हित में नहीं है। मासूम बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बच्चा मानसिक रोगी सहित कई बीमारियों की चपेट में आ सकता है।
-डॉ. अंशु एस सोम, साइकोथेरेपिस्ट, मलखान सिंह जिला अस्पताल