देश की कंपनियों में महिलाएं निदेशकों के प्रतिनिधित्व करने के मामले में पिछड़ी हैं। इसका खुलासा खुलासा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के 103 कंपनियों पर हुए एक शोध में हुआ है। इसमें पाया गया है कि इन कंपनियों के बोर्ड में महिला निदेशक करीब 21 फीसदी हैं। साथ ही पाया गया है कि लैंगिक विविधता से कंपनी बोर्ड की कार्यक्षमता बढ़ती है।
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की प्रो. आयशा फारूक व डॉ. आर रस्तोगी की देखरेख में शोधार्थी संगीता हरपलानी ने यह शोध किया है। उन्होंने पांच साल तक अध्ययन किया और 20 से ज्यादा प्रश्नावली भी बनाई, इसमें कंपनियों की महिला निदेशकों के अनुभव भी शामिल थे। साथ ही बोर्ड के अन्य सदस्यों को महिला निदेशकों के ‘पीयर’ के रूप में शामिल किया गया। इसके अलावा कंपनी सचिव, सीएफओ और सीईओ जैसे बोर्ड से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की राय ली गई।
उत्तरों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि कंपनियों में महिला निदेशकों का प्रतिनिधित्व कम है। कुल निदेशकों में केवल 21 फीसदी महिलाएं हैं, जबकि 79 प्रतिशत पद पुरुषों के पास हैं। यह स्थिति तब है, जब सभी सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम एक महिला निदेशक की नियुक्ति अनिवार्य है। अध्ययन में नतीजे सामने आए कि बोर्ड में अधिक महिलाओं को शामिल किया जाए, लेकिन केवल कानूनी अनुपालन के लिए नहीं, बल्कि नियुक्ति योग्यता, अनुभव और कौशल के आधार पर होनी चाहिए।
महिलाओं को अब भी ‘ग्लास सीलिंग’ जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। प्रबंधन को इन बाधाओं को दूर कर महिलाओं को नेतृत्व तक पहुंचाने के प्रयास करने चाहिए। ‘क्रिटिकल मास थ्योरी’ के तहत कम से कम तीन या 30 प्रतिशत महिला निदेशक होने पर ही ठोस सकारात्मक प्रभाव दिखता है। स्वतंत्र महिला निदेशकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही वरिष्ठ प्रबंधन में कार्यरत योग्य महिलाओं को बोर्ड में आगे बढ़ने के अवसर दिए जाने चाहिए।-प्रो. आयशा फारूक, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग, एएमयू
कंपनी का स्वरूप
श्रेणी संख्या फीसदी
बड़ी 14 13.6
मध्यम 37 35.9
छोटी 52 50.5
ये हैं 644 निदेशक
निदेशक संख्या
पुरुष 506
महिला 138
ये हैं 265 स्वतंत्र निदेशक
पुरुष 157
महिला 108
ये हैं कंपनी और महिला निदेशकों की संख्या
कंपनी संख्या
05 शून्य
67 01
24 02
06 03
01 05
महिला निदेशक से दिखा असर
-कॉरपोरेट गवर्नेंस का कंपनी की सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों और वित्तीय प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पाया गया।
-महिला निदेशकों की विशेषताओं पर बोर्ड की प्रभावशीलता का उल्लेखनीय असर देखा गया।
-महिला निदेशकों की संख्या (मजूबत) का कंपनी के सीएसआर, वित्त और बिक्री पर सकारात्मक प्रभाव पाया गया।
-लैंगिक विविधता से बोर्ड की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे उत्पादकता, लाभप्रदता और शेयरधारक मूल्य में वृद्धि होती है।
-महिला निदेशकों सहित बोर्ड की संरचना का कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर स्पष्ट प्रभाव सामने आया।