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गैस की किल्लत: 5000 औद्योगिक इकाइयों के थम जाएगा उत्पाद, श्मशान में भी तीन दिन से गैस का अकाल

Tue, 10 Mar 2026 05:02 PM IST
Chaman Kumar Sharma दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

पिछले तीन दिनों से गैस आपूर्ति ठप होने के कारण अब लावारिस शवों को पंचतत्व में विलीन करने के लिए फिर से पारंपरिक लकड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। नुमाइश श्मशान गृह स्थित गैस चलित शवदाह गृह में गैस आपूर्ति रुकने से अब तक तीन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार लकड़ी से करना पड़ा है।
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एलपीजी गैस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गैस की किल्लत से अलीगढ़ शहर की लगभग 5,000 औद्योगिक इकाइयों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इन इकाइयों के पहिये थम सकते हैं।

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इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष यतिंद्र वाईके कहते हैं कि उनके संगठन में 700 से अधिक औद्योगिक इकाइयां जुड़ी हैं। गैस का उपयोग मूर्ति निर्माण में बहुतायत से होता है। इसके अलावा डाईकास्टिंग में भी गैस का उपयोग होता है। आपूर्ति बाधित होने के चलते इन पर संकट मंडरा रहा है।

तालानगरी औद्योगिक युवा संगठन के अध्यक्ष राजकुमार उपाध्याय कहते हैं कि जिंक और एल्युमिनियम के हार्डवेयर में गैस का उपयोग होता है। इन का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। औद्योगिक विकास एसोसिएशन के अध्यक्ष नेकराम शर्मा कहते हैं कि रामघाट रोड तालानगरी में 850 से अधिक उत्पादन यूनिट हैं। गैस की आपूर्ति बिगड़ी तो आगे और भी जटिल स्थिति हो सकती है। दूसरी ओर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केके तिवारी कहते हैं कि तेल कंपनियों के निर्देश के बाद कॉमर्शियल सिलिंडर की बुकिंग बंद रहेगी। जो डीलरों के पास स्टॉक में हैं वही सिलिंडर दिए जाएंगे। डिफेंस, अस्पताल, और आपात इस्तेमाल को सिर्फ छूट दी गई है।

हमने सभी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स से बातचीत की है। फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। हम स्थिति पर पूरी तरह नजर रखे हुए हैं। जहां तक व्यावसायिक गैस सिलिंडर के संबंध में आए निर्देशों की बात है तो इसके उपभोक्ता कम हैं। घरेलू एलपीजी के उपभोक्ताओं की संख्या और उपभोग अधिक है। - सत्यवीर, जिला पूर्ति अधिकारी

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श्मशान में भी तीन दिन से गैस का अकाल
पिछले तीन दिनों से गैस आपूर्ति ठप होने के कारण अब लावारिस शवों को पंचतत्व में विलीन करने के लिए फिर से पारंपरिक लकड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। नुमाइश श्मशान गृह स्थित गैस चलित शवदाह गृह में गैस आपूर्ति रुकने से अब तक तीन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार लकड़ी से करना पड़ा है। मानव उपकार संस्था के प्रमुख विष्णु कुमार बंटी ने बताया कि एक शव के अंतिम संस्कार में 19 किलो के करीब डेढ़ सिलेंडर की खपत होती है। व्यावसायिक सिलिंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण लकड़ी से अंतिम संस्कार करना पड़ा।

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