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Exclusive: अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर के पास है गैस बॉटलिंग प्लांट, ज्वलनशील गतिविधियों को लेकर हैं प्रतिबंध

Thu, 23 Feb 2023 04:18 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा

सार

अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर गैस बॉटलिंग प्लांट से सटा हुआ है। ज्वलनशील गतिविधियों को लेकर आवंटी, निवेशक बॉटलिंग प्लांट के प्रतिबंधों का ध्यान रखें। डिफेंस कॉरिडोर की समीक्षा संबंधी जनवरी-फरवरी की उद्योग बंधू की बैठक में निवेशकों की ओर से यह मुद्दा जोर शोर से उठाया गया।
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इंडेन गैस बॉटलिंग प्लांट - फोटो : साेशल मीडिया
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विस्तार
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डिफेंस कॉरिडोर के जिस अलीगढ़ नोड से आयुध और रक्षा उत्पाद तैयार किए जाने की तैयारी है। उस कॉरिडोर के सहारे आईओसीएल का बॉटलिंग प्लांट पहले से संचालित है। यह बात यूपीडा को कॉरिडोर विकसित होने के डेढ़ वर्ष बाद याद आई है। पिछले वर्ष के अंतिम दौर में यूपीडा की ओर से निवेशकों को इसे लेकर एक पत्र मिला है, जिससे निवेशक हैरान हैं। 

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पत्र के जरिये उन्हें याद दिलाया गया कि कॉरिडोर गैस बॉटलिंग प्लांट से सटा हुआ है। ज्वलनशील गतिविधियों को लेकर आवंटी/निवेशक बॉटलिंग प्लांट के प्रतिबंधों का ध्यान रखें। डिफेंस कॉरिडोर की समीक्षा संबंधी जनवरी-फरवरी की उद्योग बंधू की बैठक में निवेशकों की ओर से यह मुद्दा जोर शोर से उठाया गया। जिसमें कहा गया कि आपके स्तर से कॉरिडोर में जल्द से जल्द यूनिट शुरू कर उत्पादन शुरू करने का जोर दिया जा रहा है। 

वहीं यूपीडा के स्तर से यह पत्र भेजा गया है। वह भी तब यह बात याद दिलाई जा रही है, कॉरिडोर विकसित हो चुका है। अब इसमें यूनिटों की स्थापना और उत्पादन का काम शेष है। एक-दो यूनिट 2024 तक उत्पादन शुरू करने की तैयारी में हैं। इस पर डीएम व उद्योग केंद्र के संयुक्त आयुक्त की ओर से सभी निवेशकों को संतुष्ट किया गया और कहा कि उनकी एनओसी में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। आप लोग अपना काम शुरू करें। साथ में संयुक्त आयुक्त की ओर से बैठक की कार्यवृत में मुद्दा शामिल कर यूपीडा व सभी निवेशकों को पत्र लिखा है।
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डीएम की संस्तुति पर केंद्र देगा आयुध संबंधी एनओसी
डिफेंस कॉरिडोर में रक्षा उत्पाद व आयुध उत्पादों का निर्माण होगा। जिसकी एनओसी डीएम की संस्तुति पर केंद्र के स्तर से दी जाएगी। इसके लिए डीएम द्वारा निवेशकों के आवेदन पर संस्तुति रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी जाएगी।

यहां तो लोग बीड़ी भी पीते हैं, नहीं आया जवाब
डिफेंस कॉरिडोर के निवेशक इंडियन डाईकास्टिंग के स्वामी अंशुमान अग्रवाल ने स्वीकारा कि उन्हें यूपीडा की ओर से पत्र मिला था। जिस पर उन्होंने वापस एक पत्र लिखा है। जिसका जवाब नहीं आया। अंशुमान अग्रवाल की ओर से लिखा गया है कि आपके पत्र के अनुसार ज्वलनीशल पदार्थ का अभिप्राय स्पष्ट नहीं है। क्योंकि किसी भी उद्योग में आग के बिना काम संभव नहीं है। 

यहां तो ग्राइंडर, ड्रिल मशीन, भट्ठी, गैस व इलेक्ट्रिक वैल्डिंग सभी में आग या चिंगारी होती है। आईओसीएल के सामने व आसपास लोग बीड़ी पीकर घूमते रहते हैं। यह भी उच्च जोखिम स्रोत है। वहां आवासीय इलाके में आग का प्रयोग होता है। जानकारी के अभाव के कारण आपके पत्र से निवेशक अनिश्चितता में हैं। कृपया प्रतिबंधित व अप्रतिबंधित औद्योगिक कार्यों का विवरण उपलब्ध कराएं। अंशुमान का कहना है कि इस पत्र का आज तक जवाब नहीं आया है।

यूपीडा द्वारा पिछले वर्ष इस तरह का पत्र निवेशकों को दिया गया था। उनके द्वारा उद्योग बंधू में यह विषय उठाया गया। सभी को हमारे व डीएम स्तर से संतुष्ट किया गया है। उनको किसी तरह की दिक्कत या एनओसी में परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इस संबंध में एक पत्र निवेशकों व यूपीडा को भी लिखा गया है। प्रयास है कि जल्द वहां निवेशक अपनी यूनिटें स्थापित करें। -बीरेंद्र कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग
यह प्रकरण उद्योग बंधू की बैठक में संज्ञान में आया है। उद्यमियों को भरोसा दिया गया है कि प्रशासन उनके साथ है आप अपना काम जारी रखें। इसके लिए शासन स्तर से भी व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर समस्या का समाधान कराया जाएगा। -इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी

निवेशकों को मिला यूपीडा का पत्र

डिफेंस कॉरिडोर अलीगढ़ नोड से सटा हुआ इंडियन ऑयल का बॉटलिंग प्लांट है। बॉटलिंग प्लांट से कितनी दूरी पर किस प्रकार की गतिविधियां संचालित करने के प्रतिबंध पर आईओसीएल से अभिमत प्राप्त किया गया। इस पर आईओसीएल ने अवगत कराया कि बॉटलिंग प्लांट मात्रात्कम जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्लांट परिसर की एक किमी परिधि का क्षेत्र जोखिम की श्रेणी में आता है। प्लांट में अतिज्वलनशील पदार्थ का भंडारण व बॉटलिंग किया जाता है। इसलिए यह भी अनिवार्य है कि प्लांट के आसपास ऐसी कोई गतिविधि न हो जो ज्वलनशील पदार्थ के लिए आग का स्रोत बने। इससे अवगत होते हुए आवश्यक कार्यवाही करें।

ये हो चुका अब तक
डिफेंस कॉरिडोर की चारों ओर से बाउंड्री, पानी की टंकी, बिजलीघर, सड़क आदि का निर्माण पूरा हुआ।
सात निवेशकों के नक्शे पास हुए और उनके द्वारा यूनिटों की स्थापना भी शुरू कर दी गई है, दो का काम तेज।

ये हैं 20 कंपनियां
एलन एंड एलवन प्रा. लि.,पीबीएम इंश्योलुसंस प्रा.लि., नित्या क्रियेशन इंडिया, दीप एक्सप्लो इक्यूपमेंट्स इंडिया लि., श्रद्धा उद्योग, प्रिकिंशन प्रोडक्ट, कोबरा इंडस्ट्री, वेरीविन डिफेंस प्रा.लि. के दो प्लॉट, एंकर रिसर्च लैब, श्री जय साईं अनु, न्यू स्पेश रिसर्च एंड टेक्नालॉजी, पी-2 लॉजीटेक प्रा.लि., नवराज मैटल वक्र्स,  एडवांस फायर एंड सेफ्टी, क्रिमशन एनर्जी एक्सपर्ट प्रा.लि., ट्रैक ट्रिक ऑप्टो डायनमिक, सिंडिकेट इंटरनेशनल, रॉयल सेल्स प्रा.लि., मिल्कॉर डिफेंस प्रा.लि., इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्री।
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परियोजना एक नजर में

 
  • 05 साल पहले अंडला में कॉरिडोर की घोषणा की गई
  • 14 सितंबर 2021 को पीएम-सीएम ने रखी आधारशिला
  • 12 किलो मीटर दूर जिला मुख्यालय से है गांव अंडला 
  • 400 हेक्टेअर क्षेत्र में कॉरिडोर स्थापित किया गया है
  • 6000 करोड़ रुपये निवेश का अनुमान चार चरणों में है
  • 100 हेक्टेयर जमीन पहले चरण में की गई है आवंटित
  • 1500 करोड़ से ज्यादा का निवेश पहले चरण में है तय
  • 20 कंपनियां स्थापित करेंगी 21 फैक्टरी
  • 2024 तक इसे पूरी तरह विकसित करने का है लक्ष्य
 
  • 10 हजार लोगों को इस परियोजना में रोजगार भी मिलेगा
  • 400 करोड़ से अधिक का निवेश मिला एमएसएमई क्षेत्र से
  • 20 निवेशकों को भूमि आवंटित कर दिया गया है कब्जा
  • 2000 करोड़ निवेश का प्रस्ताव जिले के उद्यमियों ने रखा
  • 50 किमी दूर होगा कॉरिडोर से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
  • 140 किमी दूर है कॉरिडोर से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी
  • 16 किमी धनीपुर हवाई अड्डा इस परियोजना से दूरी पर
  • 14 किमी रेलवे स्टेशन भी इस परियोजना से दूरी पर है

यह भी है जुड़ाव
  • 100 से अधिक कलपुर्जे पहले से ही बनते हैं अलीगढ़ में
  • 6 कारोबारी जिले के पहले से जुड़े हुए हैं रक्षा मंत्रालय से
  • 4 फैक्ट्रियों में अपने शहर में भी बनाए जा रहे हैं कलपुर्जे
  • 350 तरह के कलपुर्जे अभी अलीगढ़ में तैयार किए जाते हैं
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