डिफेंस कॉरिडोर अलीगढ़ नोड से सटा हुआ इंडियन ऑयल का बॉटलिंग प्लांट है। बॉटलिंग प्लांट से कितनी दूरी पर किस प्रकार की गतिविधियां संचालित करने के प्रतिबंध पर आईओसीएल से अभिमत प्राप्त किया गया। इस पर आईओसीएल ने अवगत कराया कि बॉटलिंग प्लांट मात्रात्कम जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्लांट परिसर की एक किमी परिधि का क्षेत्र जोखिम की श्रेणी में आता है। प्लांट में अतिज्वलनशील पदार्थ का भंडारण व बॉटलिंग किया जाता है। इसलिए यह भी अनिवार्य है कि प्लांट के आसपास ऐसी कोई गतिविधि न हो जो ज्वलनशील पदार्थ के लिए आग का स्रोत बने। इससे अवगत होते हुए आवश्यक कार्यवाही करें।
ये हो चुका अब तक
डिफेंस कॉरिडोर की चारों ओर से बाउंड्री, पानी की टंकी, बिजलीघर, सड़क आदि का निर्माण पूरा हुआ।
सात निवेशकों के नक्शे पास हुए और उनके द्वारा यूनिटों की स्थापना भी शुरू कर दी गई है, दो का काम तेज।
ये हैं 20 कंपनियां
एलन एंड एलवन प्रा. लि.,पीबीएम इंश्योलुसंस प्रा.लि., नित्या क्रियेशन इंडिया, दीप एक्सप्लो इक्यूपमेंट्स इंडिया लि., श्रद्धा उद्योग, प्रिकिंशन प्रोडक्ट, कोबरा इंडस्ट्री, वेरीविन डिफेंस प्रा.लि. के दो प्लॉट, एंकर रिसर्च लैब, श्री जय साईं अनु, न्यू स्पेश रिसर्च एंड टेक्नालॉजी, पी-2 लॉजीटेक प्रा.लि., नवराज मैटल वक्र्स, एडवांस फायर एंड सेफ्टी, क्रिमशन एनर्जी एक्सपर्ट प्रा.लि., ट्रैक ट्रिक ऑप्टो डायनमिक, सिंडिकेट इंटरनेशनल, रॉयल सेल्स प्रा.लि., मिल्कॉर डिफेंस प्रा.लि., इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्री।