बबरोतिया घाट पर तीन दिन पहले बही वृद्धा की तलाश करती एसडीआरएफ टीम। संवाद
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सांकरा में गंगा नदी का जलस्तर मंगलवार सुबह खतरे के निशान से नीचे आ गया। जलस्तर लगातार घटने से गंगा का पानी गांवों की गलियों से बाहर निकलने लगा है मगर खेतों में अभी भी भी भरा हुआ है, जिससे पशुओं के चारे की समस्या गहरा गई है।
सांकरा क्षेत्र में मंगलवार को गंगा का जलस्तर 2.21 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान ढाई लाख क्यूसेक है। हालांकि गांवों की आबादी में भरा पानी धीरे-धीरे निकलना शुरू हो गया है। फसलों में पानी भरे रहने से पशुओं के चारे की समस्या गहरा गई है।
मवेशियों के लिए बोए गए चारे और अन्य फसलें पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं। रुस्तमनगर, किरतौली, नगला अलिया सहित कई गांवों के संपर्क मार्गों पर जलभराव कम हुआ लेकिन आवागमन प्रभावित है। आबादी में पानी घुसने के बाद सुरक्षित स्थानों पर गए कई परिवार अभी अपने घर नहीं लौटे हैंं।
गंगा में बही वृद्धा का तीसरे दिन भी सुराग नहीं
थाना पालीमुकीमपुर क्षेत्र के गांव टोडरपुर के माजरा नगला भढ़न निवासी 65 वर्षीय श्रीमती देवी रविवार को गंगा में डूब गई थीं। राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम उनकी तलाश में जुटी हैं। एसडीआरएफ की टीम ने नाव लगाकर गोताखोरों ने मंगलवार को तीसरे दिन भी उनकी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
बोले लोग
गंगा के पानी में उसकी करीब 15 बीघा धान की फसल जल मग्न हो गई। अब पानी कम हो रहा है। शाहिद खान, सांकरा
फसल गंगा के पानी से नष्ट हो गई खेती-बड़ी ही इनकम का स्रोत था अब कोई रोजगार नहीं है। बिहारी लाल, किरतौली