जब रग्घा सेठ ने चमचम बनाना शुरू किया, तब इसका एक पीस 2 पैसे का मिलता था। अब चमचम 240 रूपये प्रति किलो के हिसाब से मिलती है। एक किलो पर 20 पीस के लगभग चढ़ते हैं। जहां पहले चमचम को मिट्टी के बर्तन में पैक कर दिया जाता था, अब इसे पॉलिथीन में रखकर गत्ते के डिब्बे में पैक कर दिया जाता है।
गुलाब जामुन की तरह है चमचम
इगलास की चमचम देखने में लगभग गुलाब जामुन की तरह होती है। इसका रंग भी गुलाब गुलाब जामुन से मिलता जुलता है। गुलाब जामुन थोड़ी नरम होती है, जबकि चमचम रबादार होती है। गुलाब जामुन अगर कोई एक खाएगा, तो चमचम 2 से 3 पीस खा जाएगा।
ऐसे बनती है शुद्ध और गुणवत्ता से युक्त चमचम
चमचम निर्माता छोटे लाल ने बताया कि चमचम बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध दूध को खट्टा से फाड़कर छैना तैयार किया जाता है। छैना में थोड़ी से सूजी मिलाई जाती है, ताकि उसके गोले बनाए जा सकें। उसमें इलाइची मिलाकर मथते थे। छैना के गोले तैयार कर उन्हें चीनी की चासनी में सेका जाता है। चमचम को ब्राउन रंग की होने तक पकाया जाता है। चमचम में घी या रिफाइंड का प्रयोग नहीं किया जाता। जिसके कारण चमचम खाने से नुकसान भी नहीं होता। चमचम शुद्ध मिठाई है, जिसमें मिलावट की सम्भावना न के बराबर होती है।
घर पर भी ऐसे बना सकते हैं चमचम
छोटे लाल बताते हैं कि चमचम को घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए ज्यादा सामान भी की जरूरत नहीं पड़ती है। दूध, इलायची, सूची और चीनी की चासनी हो। दूध को फाड़कर उसमें सूजी, इलाइची मिलाकर गोले तैयार कर लिए जाएं। इन गोलों को चीनी की चासनी में सेक लिया जाए। फिर ठंडा कर लिया जाए और घरवालों, मेहमानों को चमचम खिलाएं।
छोट लाल ने बताया कि चमचम को अगर सामान्य तापमान पर रखा जाए, तो यह 8 से 10 दिन तक सही बनी रहती है। अगर चममच को फ्रिज में खुला रखा जाए, तो यह एक महीने तक भी खाने योग्य रहती है।
चमचम के ये हैं मुरीद
छोटे लाल ने बताया कि वृंदावन की ऋतंभरा दीदी ने इगलास की चमचम का ओर्डर देकर 250 से 300 पैकट चार-चार पीस के तैयार कराए। उन्होंने चमचम के इन पैकेटों को बार्डर पर फौजी भाईयों के लिए दिया था। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्दू भी एक बार इगलास से गुजरने के दौरान चमचम लेकर गए थे। भाभी जी घर पर हैं सीरियल में गुलफाम कली का किरदार निभाने वाली फालगुनी राजाणी व सीरियल के लेखक मनोज संतोषी भी चमचम के मुरीद हैं। नेता से लेकर अभिनेता तक इगलास की चमचम का स्वाद ले चुके हैं। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, गुजरात, बिहार आदि राज्यों में चमचम के जलवे हैं। इसकी मिठास देश के कौने-कौने तक पहुंच चुकी है। लोग जब कभी अलीगढ़-मथुरा रोड पर रोडवेज बस स्टेंड के सामने गुजरते हैं, तो चमचम खरीदना नहीं भूलते हैं।
कटोरदान में इगलास की चमचम
पद्मश्री विजेता कवि अशोक चक्रधर ने "कटोरदान में इगलास की चमचम" शीर्षक से कविता लिखी है। इसमें उन्होंने चमचम के महत्व को प्रदर्शित किया है। पुराने समय में चमचम घर के कटोरदान में अपनी जगह बनाए हुए थी, पर आज फ्रिज में रखे कटोरे में इसे देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है और मुंह में पानी आने लगता है।
ऐसे पहुंचते हैं चमचम की निर्माण नगरी इगलास तक
इगलास अलीगढ़ शहर से 24 किमी दूर अलीगढ़-मथुरा रोड पर स्थित है। अलीगढ़ पहुंचकर पुराने बस स्टेंड से इगलास के लिए बस भी मिलती है। इगलास खैर से 28 किमी, हाथरस शहर से 16 किमी, सासनी से 14 किमी और मथुरा से 40 किमी दूरी पर है। इगलास के रोडवेज बस स्टेंड पर पहुंचते ही, वहां पर 40 से 50 दुकानों पर चमचम आपको बिकती हुई मिल जाएगी।
इगलास ही नहीं पूरे अलीगढ़ जनपद में किसी के घर आने पर स्वागत में अगर चमचम प्रस्तुत न की जाए, तो सत्कार अधूरा लगता है। मेहमानों को सुबह के नाश्ते में चमचम भी दी जाती है। ऐसा शायद ही कोई होगा, जो इगलास से गुजरे और चमचम न लेकर जाए। अलीगढ़ के लोगों की रिश्तेदारियों में चमचम की खास मांग होती है। रिश्तेदारों का यही कहना होता है कि हमारे यहां आना, तो चमचम लेकर जरूर आना।
चमचम से जुड़ी खास बातें
- इगलास की चमचम के आगे फीके हैं सब पकवान
- चमचम सिर्फ इगलास में ही बनती है
- इगलास के अलावा ये कहीं नहीं बिकती, अगर बिकती भी है, तो इगलास की चमचम कहकर ही बेची जाती है
- मथुरा-वृंदावन आने वाले भक्त भी चममच के लिए इगलास तक चले आते हैं
- चमचम की बिक्री पूरे साल होती है, पर दीवाली पर इसकी डिमांड बढ़ जाती है
- अलीगढ़ जनपद की मशहूर मिठाई है चमचम
- चममच इतनी लज़ीत होती है कि एक बार जो खाता है, वह दोबार जरूर मांगता है
- चमचम बनाने के कारोबार में सैकड़ों लोग रोजगार पा रहे हैं
- इगलास में रघ्घा सेठ की दुकान के साथ मंगला चमचम वाले, ननुआ मिठाई वाले, बेसवां चमचम वाले, दुर्गा चमचम आदि की दुकानों पर चमचम के चाहने वालों की भीड़ लगी रहती है
- अब तो लोग चमचम गिफ्ट में भी देते हैं
- इगलास की चमचम को जीआई टैग भी मिलने की चर्चा है।