इगलास क्षेत्र के कस्बा गोरई के पालीटेक्निक छात्र हेमंत की हत्या नशे में हुए विवाद में उसके दोस्तों ने ही की थी। पुलिस ने दोनों दोस्तों को गिरफ्तार कर शनिवार को जेल भेज दिया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकारा कि घटना वाली शाम तीनों ने बैठकर शराब पी। शराब खत्म होने पर फिर से मंगाने को लेकर हुए विवाद में हेमंत की हत्या कर दी गई।
अगर वह उसे गोली न मारते तो हेमंत इतना उग्र हो गया था कि दोनों से गाली-गलौज करते हुए उसने अपनी अंटी से तमंचा निकाल लिया था। खास बात है कि इसी मामूली सी वजह के चलते पुलिस केस में साक्ष्य नहीं जुटा पाई थी और इस खुलासे के लिए पॉलीग्राफी जांच का सहारा लेना पड़ा, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह खुलासा हो सका है।
एसएसपी मुनिराज जी ने शनिवार को कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि 30 जून 2020 को पालीटेक्निक छात्र हेमंत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उसका शव कस्बे के ही एक कॉलेज कैंपस में मिला था। परिवार ने बताया था कि हेमंत एसआई का फार्म भरने घर से निकला था। अगले दिन शव मिलने पर परिवार ने अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज किया। बाद में हेमंत के पिता ने तीन लोगों पर शक जताया, लेकिन जांच में इनकी भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी।
तत्कालीन एसपी देहात अतुल शर्मा ने खुद कई दिन तक गांव में जांच की थी। इसमें हेमंत के दो दोस्त और गांव के ही भट्ठा संचालक पर शक गहराया। एसएसपी ने संदेह के दायरे में आए इन दोस्तों व अन्य लोगों से पूछताछ की। लेकिन निष्कर्ष नहीं निकल पाया। ऐसे में इस केस में पुलिस ने छह संदिग्ध लोगों का पालीग्राफ टेस्ट कराया। सीबीआई मुख्यालय दिल्ली स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की दो सदस्यीय टीम ने गांव के ही छह संदिग्ध लोगों की पालीग्राफ जांच की। एसएसपी के अनुसार पालीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट में हेमंत के दो दोस्त तरुण व अजय आठ में से पांच सवालों पर उलझ गए। इन्हीं दोनों पर रिपोर्ट में संदेह जताया और बाकी चार को क्लीन चिट दे दी।
इसी आधार पर दोनों को शुक्रवार को पुलिस ने हिरासत में लिया। रात में नए सिरे से हुई पूछताछ में उन्होंने अपना जुर्म स्वीकारते हुए बताया कि अजय ने इंटर की परीक्षा पास की थी। इसी खुशी में उसने पार्टी दी थी। इस पार्टी में अजय, हेमंत व तरुण शामिल थे। जहां शराब कम पड़ने पर हेमंत ने और शराब मंगाने का दबाव डाला। इसी बात पर विवाद हुआ तो हेमंत ने नशे में गाली देना शुरू कर दिया। अजय ने स्वीकारा कि हेमंत इतने गुस्से में आ गया कि वह अपनी अंटी से तमंचा निकालने लगा।
इस पर अजय ने अपने बैग से तमंचा निकालकर गोली मार दी। फिर वहीं छोड़कर चले गए। इसके बाद परिवार को गलत जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने हेमंत को छैछऊ में छोड़ दिया था। तलाश के दौरान वे हेमंत परिवार के साथ रहे और इधर उधर घुमाने के बाद उन्हें कालेज ले आए, जहां हेमंत की लाश पड़ी थी। इसलिए उन पर शक नहीं गहराया। बाद में पुलिस को सर्विलांस डिटेल से यह पता चला कि आखिरी समय तीनों साथ थे।
मगर, इसके अलावा इन दोनों के खिलाफ कोई सुराग नहीं था। एसएसपी ने बताया कि दूसरे पक्ष पर परिवार ने संदेह जताया था। इसलिए उनका भी परीक्षण कराया गया था। इधर, इन दोनों ने रात में वह तमंचा भी बरामद कराया, जिससे हत्या की गई थी। इस मौके पर एसपी क्राइम डॉ. अरविंद, सीओ मोहसिन खान, सीओ राघवेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
अचानक घटना की वजह से नहीं मिला सुराग
एसएसपी ने स्वीकारा कि यह हत्या किसी रंजिश में नहीं की गई थी। यह हत्या उन दोस्तों ने की जो साथ घूमते रहते थे। इसलिए न तो किसी को उन पर शक था और हत्या चूंकि अचानक हुए विवाद में हुई। इसकी पहले से कोई प्लानिंग नहीं थी। इसलिए साक्ष्य नहीं मिल रहे थे।
पुलिस को था विश्वास, पर नहीं थी स्वीकारोक्ति
एसएसपी ने बताया कि इस घटना में पुलिस को अपनी जांच के बाद यह विश्वास हो गया था कि हत्या दोनों दोस्तों या भट्ठा संचालक परिवार से जुड़े विवाद में ही हुई है। दोनों से कड़ाई से पूछताछ भी हुई। मगर न तो दोस्त पक्ष ने साक्ष्य के अभाव में अपनी स्वीकारोक्ति दी और न दूसरे पक्ष ने दी थी। इसलिए हमने जान बूझकर इसमें वैज्ञानिक साक्ष्य के सहारे जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और सफलता मिली।
खुलासे तक पहुंचने में ये रहे आगे
इस खुलासे में एसएसपी के निर्देश पर एसपी क्राइम, सीओ मोहसिन खान और मौजूदा एसओ लोधा तत्कालीन एसएसपी पेशकार अजीत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह लोग लगातार इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों पर काम करते रहे और घटना को खुलासे तक पहुंचाया। गिरफ्तारी टीम में इंस्पेक्टर इगलास प्रदीप कुमार आदि शामिल रहे।
पहले खुलासे ने खींची लकीर
आठ माह पुराने ब्लाइंड केस का सीबीआई की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की मदद से खुलासा करने का जिला पुलिस का यह पहला प्रकरण है। इस खुलासे ने एक लकीर खींच दी है, जिस घटना में लगातार कई महीने तक पुलिस साक्ष्य नहीं जुटा पाई। दो पक्षों के छह लोगों पर संदेह रहा। मगर पुलिस ने हार नहीं मानी और पॉलीग्राफी की मदद से खुलासा किया। आगे भी इस केस को नजीर बनाकर पेश किया जाएगा।
अभी इन पांच घटनाओं में पॉलीग्राफी की तैयारी
एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि इस पहले मामले में सफलता मिलने पर जिले के पांच ऐसे ही ब्लाइंड केसों में यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिनमें से एक लोधा से युवती गायब होने के मामले में अनुमति मिल गई है और सीबीआई टीम ने भी समय दे दिया है। इसके अलावा छर्रा में एक युवक पर हमले की घटना, गभाना में एक महिला की हत्या के दौरान दुष्कर्म का मामला, लोधा में पशु चिकित्सक की अपहरण के बाद हत्या, गांधीपार्क में डोरी नगर से बच्चे की हत्या कर शव क्वार्सी बाईपास पर फेंकने के मामले में यह प्रक्रिया अपनाई जानी है।
इन वजहों से पॉलीग्राफी की जरूरत
उन्होंने बताया कि लोधा की युवती के मामले में दो लोग जेल चले गए। मगर युवती का आज तक पता नहीं चला। इसी तरह गभाना में महिला की हत्या के मामले में दुष्कर्म के संकेत मिल रहे हैं, मगर साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह लोधा के डॉक्टर की हत्या में कुछ लोगों पर संदेह है, मगर साक्ष्य नहीं हैं। इसीह तरह छर्रा के हमले के मामले में आरोपियों के प्रति साक्ष्य नहीं हैं। इसी तरह गांधीपार्क के बच्चे की हत्या में भी कोई साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं।