डा. जहांगीर, सहायक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सहित कुछ अन्य शिक्षण संस्थान के छात्र बड़ी कंपनियों में नौकरी के नाम पर ठगी का शिकार होने से बच गए। इन लोगों से कंपनियों में प्लेसमेंट के नाम पर रुपये मांगे गये। जब छात्रों ने कंपनी की वेबसाइट के माध्यम से हेड क्वार्टर पर संपर्क किया तो स्थिति साफ हुई।
सिविल लाइन के मेडिकल रोड पर रहने वाले एक छात्र (छात्र के अनुरोध पर नाम नहीं दे रहे हैं) ने इंजीनियरिंग की है। कुछ दिन पहले उन्होंने प्लेसमेंट कैंप में आई कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया। इसके बाद उनका साक्षात्कार हुआ। कुछ दिन बाद छात्र के मोबाइल पर फोन आया तथा वेरिफिकेशन और सिक्योरिटी बतौर 40 हजार रुपये जमा करने के लिये कहा गया। साथ ही कॉल लेटर रिलीज करने का आश्वासन दिया। इस बातचीत के बाद छात्र को कुछ शक हुआ और उसने संबंधित कंपनी के गुड़गांव स्थित हेड क्वार्टर में फोन किया। वहां से बताया गया कि इस तरह का कोई भी कॉल उनके यहां से नहीं किया गया है। छात्र ने बताया कि इस तरह के तीन कॉल अन्य आवेदकों के पास भी आए थे, लेकिन कंपनी से क्रॉस वेरिफिकेशन के बाद उन्होंने उन तीनों छात्रों को भी सतर्कता बरतने के लिए कहा।
दिलचस्प बात यह रही कि जब उन तीनों छात्रों ने भी कंपनी के हेड क्वार्टर फोन किया तो वहां से पता लगा कि उनके पास आए फोन कॉल फर्जी थे। नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के संबंध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर साद हमीद ने आगाह किया कि अगर कोई कंपनी या व्यक्ति नौकरी देने के नाम पर पहले रुपये मांग रहा है तो यह समझ लीजिए कि वह पूरी तरह फर्जी है। नौकरी देने वाला नौकरी के एवज में वेतन का भुगतान करता है ना कि पहले रुपये मांगता है। बल्कि कुछ कंपनियां तो स्किल डेवलपमेंट के लिए अपनी ओर से ही आवेदकों को विशेष प्रशिक्षण सत्र में भेजती हैं।
महामारी के काल में बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां गई हैं। कुछ असामाजिक तत्व इस स्थिति का फायदा उठाना चाहते हैं। छात्रों को और आवेदकों को इसको लेकर पूरी तरह सावधान रहना चाहिए। जिस कंपनी में आवेदन किया है, उसके अधिकारियों के संपर्क में रहना चाहिए।
-डा. जहांगीर, सहायक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर, एएमयू