गर्भवती भैंसों की अवैध कटाई का विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी के मामले को अदालत ने संज्ञान लिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-02 ने मामले में चार आरोपियों को तलब किया है। इन सभी आरोपियों को 10 अगस्त को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है।
पूरा मामला थाना रोरावर क्षेत्र का है। जाहिद ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया। इसमें कहा है कि वह ठेकेदारी के तहत मजदूरों के साथ फेयर एक्सपोर्ट के कट्टीघर में काम करता था। आरोप है कि उस फर्म में गर्भवती भैंसों को काटा जा रहा था जिसके कारण पेट से आधे-अधूरे बच्चे निकल रहे थे। इसका वीडियो भी है। जब परिवादी जाहिद ने इसका विरोध किया और भैंसों की कटाई करने से मना किया तो फर्म से जुड़े लोगों मुस्ताक (जीएम), शहबाज (एचओडी), अब्दुल हक और नजीमुद्दीन ने सिक्योरिटी गार्ड्स को बुला लिया। इसके बाद आरोपियों ने परिवादी और उसके मजदूरों के साथ गाली-गलौज कर लाठी-डंडों से बुरी तरह पिटाई की। उन्हें जबरन बंधक बनाकर मजदूरी करवाई। पीड़ित का आरोप है कि घटना के बाद से आरोपी लगातार उसे और उसके परिवार को धमकी दे रहे हैं कि यदि इसकी शिकायत कहीं भी की तो जान से मार दिया जाएगा।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आदेश दिया कि विपक्षियों को नोटिस दिए जाने के बावजूद उनकी ओर से कोई भी आपत्ति दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने उनका आपत्ति का अवसर समाप्त कर दिया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट की पुष्टि के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी मुस्ताक, शहबाज, अब्दुल हक और नजीमुद्दीन के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने इन चारों आरोपियों को ट्रायल के लिए तलब किया है। साथ ही जाहिद को अपने साक्ष्यों की सूची दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
ठेकेदार से जीएसटी के भुगतान का विवाद था। जो भी आरोप ठेकेदार ने फेयर एक्सपोर्ट फैक्टरी पर लगाए हैं वह निराधार हैं। गर्भ से निकले भैंस के बच्चों का जो वीडियो दिखाया जा रहा है वह यहां का नहीं है। पहले भी पशुपालन विभाग जांच कर चुका है और उसमें सब कुछ सही पाया गया। अदालत में फैक्टरी प्रबंधन अपना पक्ष रख देगा। - तबरेज, जीएम, फेयर एक्सपोर्ट