बसपा से दो बार विधायक रहे पूर्व मंत्री चौधरी महेंद्र सिंह शुक्रवार को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) में शामिल हो गए। पूर्व मंत्री ने दिल्ली में पार्टी के अध्यक्ष चौ. अजित सिंह के समक्ष पार्टी की सदस्यता ली। वे अनुशासनहीनता व सदस्यता शुल्क न जमा करने के आरोप में बसपा से निष्कासित चल रहे थे।
चौ. महेंद्र वर्ष 2002 व 2007 में लगातार कोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। वह मायावती सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। वर्ष 2012 में उन्हें तोे पार्टी ने टिकट नहीं दिया, लेकिन उनकी पत्नी राजरानी को खैर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था। हालांकि, राजरानी को चुनाव में सफलता नहीं मिल पायी थी। कांशीराम जब पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से पार्टी के अध्यक्ष बने, तब वह पार्टी के डेलीगेट मेंबर थे।
पार्टी ने उन्हें दिल्ली से वर्ष 1993 में नसीरगंज विधानसभा का चुनाव लड़वाया, जबकि वर्ष 1998 में मंगोलपुरी दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से उन्हें चुनाव लड़वाया। तब वह दिल्ली में अपना कारोबार करते थे। बसपा ने जब उन्हें अनुशासनहीनता के चलते निष्कासित किया था, तभी उनका दूसरी पार्टी में जाने की चर्चाएं थीं।
अलबत्ता, वह खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताया था। रालोद के जिलाध्यक्ष राम बहादुर ने कहा कि चौ. महेंद्र सिंह के आने से पार्टी को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया, तो उन्हें मजबूती से लड़ाएंगे। रालोद नेता जियाउर्रहमान ने भी चौ. महेंद्र के पार्टी में शामिल होने का पार्टी का फायदा बताया है।