पौधरोपण के नाम पर वन विभाग का करोड़ों रुपया डकारने के आरोपी पूर्व डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी के खिलाफ एक और मुकदमा सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ है।
अब उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने पेंशन संबंधी अपने दस्तावेज स्वयं तैयार कर उन पर वर्तमान डीएफओ एनपी उपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर कर फाइल शासन को भेजी।
शासन द्वारा फाइल की जांच कराई गई तो उनका भेद खुल गया। शासन के निर्देश पर एनपी उपाध्याय ने त्रिपाठी पर थाना सिविल लाइंस में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है।
डीएफओ एनपी उपाध्याय के मुताबिक करोड़ों रुपये गबन के आरोपों में फंसे श्रीधर त्रिपाठी निवासी लखनऊ को 30 जून को उनकी सेवानिवृत्ति तिथि से सिर्फ पांच दिन पहले ही शासन ने निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही उनकी पेंशन व सेवानिवृत्ति संबंधी फाइल पर रोक लगा दी थी।
इस पर त्रिपाठी ने वर्तमान डीएफओ की ओर से एक पत्रावली बनाकर खुद को निर्दोष बताते हुए पेंशन व अन्य सभी सुविधाओं को बहाल करने का अनुरोध पत्र बनाया। उस पर वर्तमान डीएफओ के फर्जी हस्ताक्षर कर शासन को भेज दिया। उनकी दागी छवि को देखते हुए शासन ने फाइल की जांच कराई। इसमें हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।
शासन के निर्देश पर उनके खिलाफ धोखाधड़़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अमित कुमार के मुताबिक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बता दें कि इससे पूर्व श्रीधर त्रिपाठी के खिलाफ कंधौली झील प्रकरण में सरकारी धन का गबन करने का मुकदमा दर्ज है।