कलक्ट्रेट में सोमवार दोपहर हंगामा हो गया, जब सीएमओ दफ्तर का एक कंप्यूटर ऑपरेटर यहां परिवार सहित आत्महत्या करने पहुंच गया और रोकने पर अधिकारियों से उलझ गया। लगातार मना करने के बाद जब वह नहीं माना तो उसको पुलिस के साथ थाना सिविल लाइंस भेज दिया गया। जहां से शांति भंग की धारा 151 में जेल भेज दिया गया, पत्नी बच्चों को घर भेज दिया गया। इस दौरान कुछ देर के लिए कलक्ट्रेट में हंगामा हुआ।
एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह ने बताया कि सीएमओ कार्यालय के आईडीएसपी सेल में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर चंद्रवीर सिंह ने अपने अधिकारियों के साथ अभद्रता की थी। सीएमओ द्वारा जांच समिति बनी, जिसमें अभद्रता को अपराध मानते हुए उसकी सेवा समाप्त करने की संस्तुति कर दी। इस पर डीएम ने जुलाई में एक महीने का अग्रिम मानदेय देकर उसकी सेवा समाप्त कर दी।
कुछ दिन बाद ही उसने नौकरी का पुन: प्रत्यावेदन डीएम को दिया तो उसको कोरोना कंट्रोल रूम में महीने दो महीने अवैतनिक कार्य करने के मौखिक निर्देश दिए गए। शर्त ये थी कि आचरण में सुधार लाओ नहीं तो नौकरी जाएगी। लेकिन सुधरने की जगह वह बिगड़ने लगा। वह कोरोना कंट्रोल रूम में भी अधिकारियों को गुमराह करने लगा।
उसने सीएमओ कार्यालय के फर्जी पत्र का उल्लेख कर कंट्रोल रूम इंचार्ज स्मृति गौतम को गुमराह करते हुए अपनी उपस्थिति सत्यापित कराकर सीएमओ कार्यालय भेज दी। जब कंट्रोल रूम इंचार्ज को पता चला कि सीएमओ कार्यालय से उक्त पत्र जारी नहीं हुआ है तो उन्होंने उपस्थिति निरस्त कर सीएमओ को सूचना दी।
इतना सब होने के बाद जब चंद्रवीर डीएम से मिला तो उसको एक आखिरी मौका और मिला था लेकिन उसने आउटसोर्सिंग के माध्यम से ऑपरेटर के पद पर काम करने से मना कर दिया। उसने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर पत्नी व बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट में आत्मदाह करने की धमकी दी।
सोमवार को आत्मदाह की खबर मिलने पर डीएम ने एडीएम सिटी, एसीएम द्वितीय को कार्रवाई के निर्देश दिए। चंद्रवीर सिंह जब अपनी पत्नी व बच्चों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा तो उसने अधिकारियों के साथ ऊंची आवाज में बात करते हुए पुन: अभद्रता की। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह ने कहा कि पत्नी व बच्चों को लाने का क्या उद्देश्य है तो उसने कहा कि वह पत्नी व बच्चों के साथ यहीं आत्महत्या करेगा, नहीं तो उसे सीधे नौकरी पर रखा जाए।
उसने यह भी आरोप लगाया कि जब भी वह डीएम कार्यालय में प्रार्थना पत्र लेकर आता है, उसे थाने भेज दिया जाता है। एसीएम द्वितीय ने कहा कि ऑपरेटर के अनुरोध पर डीएम ने दो बार उसको मौका दिया। लेकिन आचरण दुरुस्त नहीं होने, अधिकारियों को गुमराह करने, झूठ बोलने, अधिकारियों से अभद्रता करने के कारण उसको थाना सिविल लाइन भेज गया है। जहां विधिक कार्रवाई के बाद उसको जेल भेज दिया गया है।