एक डॉक्टर ने सफाई कर्मचारियों और वार्ड ब्वॉय के साथ गालीगलौज कर मारपीट कर दी। उसके बाद मलखान सिंह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित स्टॉफ कर्मियों ने डॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इमरजेंसी में ताला बंदी कर उसे ठप कर दिया और अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी।
हंगामे के चलते इमरजेंसी में भर्ती मरीज भाग गए और एक बीमार बच्चे की मौत हो गई। बच्चे के परिजन उसका शव लेकर चले गए। आक्रोशित कर्मियों की मांग है कि आरोपी डॉक्टर को बर्खास्त किया जाए और उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
जिला अस्पताल कर्मचारी संघ के मंत्री राजेश चौहान, उपाध्यक्ष सुरेशचंद्र दीवान, ब्रज मोहन, गोपाल बाबू आदि ने बताया कि इमरजेंसी में नवी हुसैन नाम का एक वार्ड ब्वॉय काम करता है। गुरुवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉ. शहजाद कुरैशी की ड्यूटी थी। नवी हुसैन किसी मरीज की तीमारदारी में व्यस्त था। इसी दौरान डॉ. कुरैशी ने उसे कॉल किया, लेकिन उसे आने में देर हो गई।
आरोप है कि इसी बात पर नवी हुसैन ने उसके के साथ गाली गलौज करते हुए अभद्रता और मारपीट कर दी गई। इस बात की जानकारी जब अन्य स्टाफ कर्मियों को हुई तो वह आक्रोशित हो गए। देखते ही देखते इमरजेंसी में स्टॉफ कर्मियों की भीड़ लग गई। आक्रोशित स्टाफ के लोगों ने हंगामा करते हुए इमरजेंसी पर ताला जड़ दिया। हंगामा होते देख वहां से डाक्टर पहले भी भाग गए। मरीजों ने भी वहां से पलायन कर दिया।
एक महिला करीब छह साल के बच्चे को लेकर आई, लेकिन हंगामे के चलते उसे उपचार नहीं मिला और बच्चे की मौत हो गई। हालांकि बच्चे की स्थिति बेहद गंभीर थी और उसके बचाने की संभावना बेहद कम थीं। हंगामा होते देख महिला मृत बच्चे को लेकर चली गई। सफाई कर्मचारियों और स्टॉफ ने ऐलान किया है कि जब तक डॉक्टर के खिलाफ खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर बर्खास्त नहीं किया जाता है, तब तक काम काज शुरू नहीं किया जाएगा। अस्पताल के सीएमएस डॉ. सत्य सिंह ने कहा है कि इस मामले में पीड़ित जो लिखित में देगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मलखान सिंह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गुरुवार को हुए हंगामे और उपद्रव की का शिकार बच्चे के अलावा एक महिला भी हो गई। इमरजेंसी में तालाबंदी के चलते वार्ड संख्या 2 में बेड संख्या 6 पर भर्ती एक महिला की मौत हो गई। सबसे ज्यादा हृदय विदारक बात यह रही कि मृत महिला का शव उपचार करा रहे के बीच ही पड़ा रहा। उसका शव उठा कर मोर्चरी में रखने वाला कोई कर्मचारी काम पर नहीं था।
स्थिति यह हुई कि एक बेड पर शव पड़ा था और अन्य बेडों पर मरीज उपचाराधीन थे। उनके तीमारदारों को यह देखकर बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। थाना विजय गढ़ के गांव मानिकपुर की रहने वाली 63 वर्षीय पाना देवी को बुधवार को सांस और अन्य बीमार की चलते तबियत खराब होने पर जिला अस्पताल लाया गया।
इमरजेंसी में उपचार के बाद उन्हें वार्ड संख्या 2 में भर्ती करा दिया गया। पाना देवी की गुरुवार को फिर से तबियत बिगड़ गई। लेकिन इमरजेंसी में तालाबंदी थी। कुछ देर बाद पाना देवी ने दम तोड़ दिया। इसकी सूचना अन्य मरीजों के तीमारदारों ने स्टाफ को दी लेकिन अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते पाना देवी का शव वार्ड में बेड से हटाकर मोर्चरी में रखने वाला भी कोई नहीं था।