प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही कह रहे हों कि सरकार वह है जो गरीबों के लिए काम करे। सीएम योगी आदित्य नाथ भी लगातार कहते रहे कि गरीबों को अहसास होगा कि सरकार बदली है। लेकिन हकीकत इसके ठीक विपरीत है। कम से कम गरीबों के घर की रोशनी एवं चूल्हे को गरमाने के लिए राशन पर मिलने वाले मिट्टी के तेल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से तो ऐसा ही लगता है।
पेट्रोल, डीजल का रेट तो लगातार बढ़ ही रहा है। लेकिन इस बीच मिट्टी के तेल पर गरीब को छोड़कर किसी का ध्यान नहीं है। दिसंबर से अब तक मिट्टी के तेल के दामों में छह रुपये से अधिक का इजाफा हो चुका है।
बढ़ोत्तरी निरंतर जारी है। हर माह कम से कम दो बार 25 से लेकर 50 पैसे तक बढ़ाए जा रहे हैं। गत माह तो एक रुपये की बढ़ोत्तरी हुई। यही नहीं स्टाक में भी एक हजार किलोलीटर तक की कटौती कर दी गई है।
गरीबों के चूल्हे लगातार ठंडे पड़ते जा रहे हैं, लेकिन सरकार मात्र गरीबों का हितैषी होने का ढिंढ़ोरा पीटने में ही लगी है।
मिट्टी के तेल के रेट शासन स्तर से ही बढ़ रहे हैं। पूरे प्रदेश में यही स्थिति है। स्टाक में भी एक हजार किलोलीटर की कटौती की गई है। इसी हिसाब से पूर्ति विभाग व्यवस्थाएं कर रहा है। - नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी