इस पर दरोगा को समझाने की दृष्टि से कहा कि न्यायालय में यह देखा जाना जरूरी है। इस पर दरोगा ने तर्क दिया कि आपका काम रिमांड करना है। कागजों की बारीकी न देखते हुए रिमांड करना आपकी मजबूरी है। इस पर दरोगा को इस तरह की भाषा का प्रयोग न करने की हिदायत दी गई तो वह धमकाते हुए बोला कि पुलिस ने अच्छे- अच्छे लोग सही किए हैं।
आपके खिलाफ रिपोर्ट लिख देंगे और यह कहते हुए केश डायरी व प्रपत्र फेंकते हुए कहा कि यह कागज आप रख लें। हम मुल्जिमों को ले जा रहे हैं और यह रिपोर्ट लिखवाएंगे कि आपने अपमानित कर आत्महत्या के लिए मजबूर किया है। इसके बाद दरोगा सचिन वहां से चले गए। ऐसा दरोगा ने इस आशय से किया कि वे उनके दबाव में आकर बिना प्रपत्रों की जांच पड़ताल किए ही रिमांड मंजूर कर लें। न्यायिक अधिकारी ने इसे न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में माना है, क्योंकि यह डरा- धमकाकर न्यायिक आदेश प्राप्त करने का प्रयास है।
रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा भेजी गई रिमांड रिपोर्ट मिल गई है। इसकी जांच करायी जा रही है। पूरे प्रकरण की जानकारी जिला जज के संज्ञान में है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस मामले में अवगत करा दिया गया है। संपूर्ण जांच के बाद ही साफ होगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई तय की जाएगी। -संजीव सुमन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक