अनुसूचित जाति के नौकर को छेड़खानी के आरोप में दुकानदार परिवार द्वारा पीटे जाने की इस घटना में बृहस्पतिवार को जातीय तूल देकर माहौल बिगाड़ने की पूरी कोशिश हुई। इसी के चलते पहले रेलवे रोड की दुकान पर और फिर देहली गेट चौराहे पर पहुंचकर धरना और सड़क जाम शुरू किया गया।
इस दौरान हालांकि तमाम भाजपा नेता पहुंच गए, मगर शहर विधायक के न आने पर मुखालफत की गई और शहर विधायक के विरोध में नारेबाजी हुई। इसी बीच वहां पहुंचकर पूर्व मेयर शकुंतला भारती ने मोर्चा संभाला और वीडियो कॉल पर एक आरोपी को हिरासत में लिए जाने का तथ्य दिखाया, तब जाकर हंगामा शांत हुआ। इस दौरान एक बार युवक की मौत की अफवाह ने और बात बिगाड़ने का काम किया, मगर सच सामने पर उस मुद्दे को भी शांत किया गया।
देहली गेट चौराहे पर करीब साढ़े दस बजे जब धरने की शुरुआत हुई तो शुरुआत में पुलिस प्रशासन उन्हें समझाने में लगा रहा। कुछ भाजपा नेता भी पहुंच गए, मगर काफी देर बाद तक शहर विधायक के न आने पर बात को तूल दिया जाने लगा। इसे अनुसूचित जाति बनाम सवर्ण से जोड़कर तरह-तरह की टीका-टिप्पणी होने लगीं।
शहर विधायक विरोधी नारेबाजी तक की गई। इसी बीच पूर्व मेयर शकुंतला भारती ने पहुंचकर शहर विधायक के बाहर होने की बात कही। परिवार व पुलिस प्रशासन से वार्ता शुरू हुई। जैसे-तैसे हालात नियंत्रित किए जा रहे थे कि अचानक अफवाह फैल गई कि अशोक की मौत हो गई है। इस पर मामला और बिगड़ गया। बाद में पुलिस ने मेडिकल कॉलेज में अशोक के साथ मौजूद उसके पिता से लोगों की बात कराई।
तब स्थिति संभली। बाद में गिरफ्तारी की जिद सामने आने पर दीपक नाम के एक आरोपी को हिरासत में लिए जाने संबंधी वीडियो कॉल दिखाई गई। तब जाम खुला। इस दौरान गिरफ्तारी के अलावा मुफ्त उपचार, अशोक पर दर्ज मुकदमा वापस करने की मांग को लेकर कई बार पुलिस से नोकझोंक, हंगामा और नारेबाजी हुई।
बृहस्पतिवार को दिन में अशोक को जेएन मेडिकल कॉलेज से पहले एक ट्रामा सेंटर भेजा गया था और फिर वहां दोपहर में परिजन वापस मेडिकल कॉलेज ले गए थे। इसी दौरान किसी ने मौत की अफवाह उड़ा दी थी।
जाम में मां-बेटी से अभद्रता, जनाजे को रास्ता दिया
देहली गेट चौराहे पर जाम के दौरान युवक बेहद अराजक स्थिति में थे। इस दौरान स्कूटी सवार मां-बेटी से जाम में होकर निकलने पर अभद्रता कर दी गई। बाद में कुछ लोगों ने मामला शांत कराया। यह मां-बेटी पत्थर बाजार से गूलर रोड की ओर जा रही थीं। इस दौरान एक जनाजा भी वहां से निकला। उसे भी रोकने का प्रयास हुआ, मगर कुछ लोगों के बीच में आने पर रास्ता दे दिया गया।
पिता अस्पताल में और मां धरने पर
इस पूरे प्रकरण में एक तरफ परिवार के साथ समाज के लोग खड़े थे। चूंकि इलाके में यह समाज बहुसंख्यक है, इसलिए हालात बिगड़े रहे और भारी भीड़ मौजूद रही। इस दौरान अशोक की मां विद्या देवी धरने पर रहकर नेतृत्व करती दिखीं, जबकि पिता अस्पताल में थे। घर में चार भाई बहन हैं। परिवार के अन्य सभी सदस्य भी अस्पताल में ही रहे। इस दौरान बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह भी मां के साथ धरना स्थल पर रहे और समर्थन किया। बाद में वह अशोक को देखने भी पहुंचे।
यह है पक्ष-प्रतिपक्ष का दावा
पहले बोतल से पानी पीने, फिर वेतन न देने का आरोप
इस मामले में अशोक पक्ष ने सुबह यह आरोप लगाकर बखेड़ा खड़ा किया कि अशोक ने अपने दुकानदार की पानी की बोतल में से पानी ले लिया था। इस बात पर उसे पीटा गया। बाद में यह बात उजागर हुई कि छह माह से वेतन न देने के विवाद में मारपीट हुई। त्योहार पर रुपये मांगने पर उसे सरियों आदि से बेरहमी से पीटकर सड़क पर ही छोड़ दिया। खुद परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान मारपीट की घटना सीसीटीवी में पुलिस को कैद मिली है।
इधर, गौरव पक्ष का आरोप है कि सीसीटीवी में अशोक द्वारा दुकानदार की पत्नी के साथ अश्लील हरकत व अभद्रता सीसीटीवी में कैद है। उसके बाद ही यह विषय तूल पकड़ा है। पुलिस ने जांच में सीसीटीवी में यह घटना खुद संकलित कर ली है।