संभवत: पहली बार शहर में दीपावली पर यह नजारा देखने को मिला। शहर के कुछ इलाकों में पटाखों, बमों और आतिशबाजी के साथ ही लाइसेंसी शस्त्रों से भी फायरिंग की गई। हालांकि कुछ लोग इसे त्योहार पर शगुन के तौर पर अदा की गई रस्म के तौर पर भी देख रहे हैं।
शहर में सुरेंद्र नगर, धनीपुर, एटा चुंगी, नौरंगाबाद, मानसरोवर, ज्ञान सरोवर, विष्णु पुरी, रमेश विहार, क्वार्सी के कुछ मोहल्ले, रघुवीर पुरी आदि अन्य इलाकों में देखा गया कि लोगों ने अपनी लाइसेंसी डबल बैरल, रिवाल्वर, पिस्टल, राइफल आदि से फायरिंग की।
इस फायरिंग से कहीं कोई असहजता या अप्रिय स्थिति तो देखने में नहीं आई लेकिन आसपास के लोगों को यह दृश्य कौतुहल पूर्ण लगा। समाजशास्त्री डॉ. उमेश दीक्षित कहते हैं कि हथियारों का प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। मानव सभ्यता के विकास क्रम में हथियारों को धारण करना वीरोचित माना गया है।
त्योहार पर रस्म अदायगी के लिए भी इसे जोड़कर देखा जा सकता है। शस्त्र का प्रदर्शन और उपयोग में तब तक कोई परेशानी नहीं है जब तक वह किसी और के लिए परेशानी का सबब नहीं बन जाए।