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हुमायूं के मकबरे में दारा शिकोह की कब्र का पता लगाना मुश्किल है : प्रोफेसर मूसवी

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भारत सरकार की ओर से दिल्ली में हुमायूं के मकबरे में दारा शिकोह की कब्र की तलाश की जा रही है। इसके लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर शीरी मूसवी से भी सलाह ली गई है। प्रोफेसर मूसवी का कहना है दारा शिकोह की कब्र को तलाश करना करीब-करीब नामुमकिन सा है, क्योंकि हुमायूं के मकबरे में 150 कब्रें हैं और किसी भी कब्र पर कोई इबारत नहीं लिखी है, जिससे शिनाख्त कर पाना मुश्किल होगा।
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प्रोफेसर मूसवी कहती हैं कि हुमायूं का मकबरा मुगल परिवार का कब्रिस्तान रहा है और वहां पर शाही परिवार के अन्य सदस्य भी दफनाए जाते रहे हैं। वह कहती हैं कि जिस तरह दारा शिकोह की जान ली गई थी और उस समय जो औरंगजेब का तरीका हुआ करता था, उसके बाद स्पष्ट तौर पर यह पता नहीं चल सका है कि दारा शिकोह को कहां पर दफनाया गया था लेकिन हुमायूं के मकबरे में दफनाए जाने की थ्योरी का आधार सिर्फ यही है कि यहां पर शाही परिवार के सदस्यों को उनकी मौत के बाद दफन किया जाता था।
दूसरी ओर जानकार कहते हैं कि भारत सरकार दारा शिकोह को आदर्श मुस्लिम चरित्र के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है। इसीलिए दारा शिकोह से जुड़ी प्रत्येक जानकारी और निशानियां प्रमुखता से आगे लाना चाहती है। भारत सरकार ने दारा शिकोह की कब्र का पता लगाने के लिए पुरातत्वविद और इतिहास के जानकारों की टीमें गठित की हैं जो इस दिशा में काम कर रही है।
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एएमयू में है दारा शिकोह के नाम से इंटरफेथ सेंटर, सभी धर्मों का होता है अध्ययन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी दारा शिकोह इंटरफेथ सेंटर बना हुआ है और यहां पर विभिन्न धर्मों का अध्ययन कराया जाता है। इस सेंटर के विषय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एएमयू में संबोधन कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने भी जिक्र किया था। दारा शिकोह की सभी धर्मों के विषय में बेहद जिज्ञासा थी और वह सभी धर्मों का बहुत सम्मान करते थे। दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी में अनुवाद कराया।
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