अलीगढ़ की सदर और अतरौली तहसील में ज्यादा हैं। 1768 वक्फ संपत्तियों की जांच में 1216 सरकारी जमीनें मिलीं, जिनमें 95 फीसदी जमीनों पर कब्रिस्तान दिखाए गए। शेष पांच फीसदी में ईदगाह, दरगाह और कर्बला दर्ज हैं।
वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद वक्फ संपत्तियों से जुड़ीं फाइलें तहसीलों में खंगाली जाने लगी हैं। तीस साल पुराना रिकॉर्ड चेक किया जा रहा है। क्योंकि सदर तहसील और अतरौली में ज्यादा संपत्तियां हैं लिहाजा यहां पर रिकार्ड रूम में रखीं पुरानी फाइलों से सारा दिन धूल उड़ती रही। अब कौन सी फाइल कहां मांग ली जाए इसे लेकर मशीनरी सक्रिय हो गई है।
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वक्फ संपत्तियों को लेकर अलीगढ़ जिले में काफी मामलों की शिकायतें वक्फ बोर्ड तथा शासन स्तर पर लंबित हैं। जेपीसी में प्रस्तुत करने के लिए जब वक्फ संपत्तियों की जांच कराई गई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। 1768 वक्फ संपत्तियों की जांच में 1216 सरकारी जमीनें मिलीं, जिनमें 95 फीसदी जमीनों पर कब्रिस्तान दिखाए गए। शेष पांच फीसदी में ईदगाह, दरगाह और कर्बला दर्ज हैं। कोल में 632, अतरौली में 687, खैर में 190, गभाना में 99 और इगलास में 160 संपत्तियों की जांच की गई। गभाना तहसील में 87, इगलास में 153, खैर में 128, कोल में 245, अतरौली में 603 संपत्तियां सरकारी मिली हैं, जो वक्फ में दर्ज हैं। ये जमीनें खतौनी में ग्राम सभा आदि में दर्ज हैं।
बताया जाता है कि 1995 के बाद से वक्फ की जमीनों से जुड़े बैनामे हुए हैं। इसे लेकर शासन स्तर पर शिकायतें भी की गईं थीं, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। अब चूंकि वक्फ कानून में संशोधन होने जा रहा है तो सभी चौकन्ना हुए हैं। सवाल यह उठा कि सरकारी जमीनें वक्फ में किस तरह दर्ज हो गईं। दूसरी ओर वक्फ की गईं जमीनों के बैनामे कैसे हो गए। शुक्रवार को तहसीलों में पुराने रिकार्ड तलाशे जाते रहे।
शासन के निर्देश पर वक्फ संपत्तियों की जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। इसके बाद से शासन के नए निर्देशों का इंतजार है। वक्फ संपत्तियों के किराये से संबंधित जानकारी वक्फ बोर्ड में ही रहती है। वहीं किराया जमा होता है इसलिए जिला स्तर पर इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रहता।- निधि गोस्वामी, वक्फ आयुक्त
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वक्फ कानून में बड़ा संशोधन होने जा रहा है। जिसका बड़ा प्रभाव तहसील के कर्मचारियों पर भी पड़ेगा। क्योंकि वक्फ की जमीनों के बैनामे तहसीलों में हुए हैं, जिसमें लेखपाल और कानूनगो की मिलीभगत भी रही है। इसलिए जमीनों का रिकॉर्ड खुर्दबुर्द करने की भी संभावना है। इसलिए सरकार को इस ओर समय रहते हुए निर्णय लेना होगा।- इफराहिम हुसैन, मुस्लिम धर्मगुरु एवं अधिवक्ता