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ईएमयू पैसेंजर में महिला बोगी पर पुरुषों का कब्जा

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अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर ईएमयू के महिला कोच से उतरते पुरुष यात्री - फोटो : CITY OFFICE
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ईएमयू पैसेंजर ट्रेनों का संचालन कोरोना काल के बाद एक मार्च से शुरू हुआ है। मगर, इनमें अब पहले की तरह महिलाओं को अब उनके लिए आरक्षित बोगियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन बोगियों में पुरुष यात्री भी सफर कर रहे हैं। इसके चलते कई बार महिलाएं यात्रा के दौरान असहज भी होती हैं।
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1200 यात्रियों की है क्षमता, 1000 से अधिक यात्री जंक्शन से ही होते हैं सवार
ईएमयू पैसेंजर ट्रेन सुबह छह बजे दिल्ली के लिए रवाना होती है। इस ट्रेन में 1200 यात्रियों के बैठने की क्षमता कि 12 बोगी लगी हैं। मगर, ट्रेनों की उपलब्धता न होने के चलते इस एक ट्रेन में अलीगढ़ जंक्शन से ही 1000 से अधिक यात्री सवार होते हैं। दो महिला बोगी इस ट्रेन में आरक्षित हैं। जबकि औसतन 200 के करीब महिला यात्री स्टेशन से सफर करती हैं। पुरुष यात्रियों को जब सीट नहीं मिलती है तो वह महिला बोगियों की ओर दौड़ लगा देते हैं।
स्टेशन से महिला बोगियों में पुरुष यात्रियों को नहीं बैठने दिया जा रहा है। मगर, ईएमयू पैसेंजर ट्रेनों की संख्या कम होने के चलते उनमें यात्रियों की भीड़ के आगे के स्टेशनों से पुरुष यात्री महिला आरक्षित बोगियों में सीट उपलब्ध होने पर बैठ जाते हैं। महिलाओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
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- चमन सिंह तोमर, पोस्ट कमांडर आरपीएफ
महिलाओं के आरक्षित बोगियों में सिर्फ उनको ही बैठने दिया जाए। पुरुषों को अन्य बोगियों में यात्रा करने की सहूलियत है। दरअसल, कई बार यह भी देखने में आता है कि कई महिला अपने दुधमुंहे बच्चे को साथ लेकर भी यात्रा करती हैं। बच्चे को जब स्तनपान कराना होता है तो पुरुष यात्री पास में बैठा हो तो वह एक असहजता भरी स्थिति होती है।
- सीमा अब्बास, वन स्टॉप सेंटर प्रभारी, अलीगढ़
महिलाओं के लिए जो बोगियां आरक्षित हैं, उनमें सिर्फ महिलाओं को ही यात्रा करने का हक मिलना चाहिए। ईएमयू पैसेंजर ट्रेन में मात्र 12 बोगियां होती हैं। इनमें से सिर्फ दो बोगियां ही महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं। बाकी 10 बोगी पुरुषों के लिए हैं। महिलाएं यात्रा के दौरान खुद को सुरक्षित और सहज महसूस कर सकें, इसके लिए जरूरी है कि रेलवे को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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- नीरा वार्ष्णेय, महिला एवं बाल कल्याण समिति अध्यक्ष
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