बकरीद नजदीक आते ही शहर में खास नस्ल के बकरों की रौनक बढ़ गई है। कई लोग अपने बकरों को परिवार के सदस्य की तरह पाल-पोस रहे हैं, उन्हें चना-दूध खिला रहे हैं। खाने-पीने और देखभाल पर रोजाना सैकड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
जयगंज निवासी सैफुल्लाह खान ने बताया कि उन्होंने 2024 में छह महीने का बकरा खरीदा था, जो अब करीब 130 किलो का हो गया है। वह बकरे को सुबह और रात में करीब तीन किलो चना खिला रहे हैं। इसके अलावा दो लीटर दूध और सरसों का तेल भी दे रहे हैं। हरी पत्तियों और चारे पर रोजाना करीब 100 रुपये खर्च होते हैं। वहीं, जावेद अहमद का बकरा भी 100 किलो से ज्यादा बजनी हो गया है।