रामघाट रोड पर नरौरा 12 नंबर पुलिया से अंदर चलते ही चंडौली बुजुर्ग गांव है। यहां के शिखाशेखर चौहान का कारोबारी जुझारूपन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है। हाईस्कूल पास करने के बाद पिता मुनेश चौहान ने शेखर को बाइक दिलाने की पेशकश की लेकिन बाइक न लेकर कारोबार करने के लिए शेखर ने 30 हजार रुपये मांगे। कारोबार के लिए इकलौते बेटे की जिद पर पिता भी मान गए। शेखर ने गांव में छोटा सा मुर्गी फार्म खोला और तीन माह बाद ही पिता से लिए रुपये लौटा दिए। वह मूलधन जुटा चुके थे।
इसी बीच उनके पिता का निधन हो गया और वह अकेले हो गए। हालांकि हौसला न टूटा। इंटरमीडिएट पास कर आगे की पढ़ाई की लेकिन धन कमाने में लगा रहा। उन्होंने सरकारी योजना से 1.22 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जिसमें ब्याज पर 40 लाख की सब्सिडी देय थी। इसी धन से गांव में अपनी 22 बीघे जमीन पर 30 हजार परिंदों का ब्रायलर फार्म खोला। इसमें केवल अंडा उत्पादन होता है। इस कारोबार के दम पर अपनी पांच बहनों की शादी की। आज वो गांव वालों के बीच चर्चा के केंद्र में है।
वह इस कारोबार का निरंतर प्रशिक्षण लेते रहते हैं। कोरोना काल में रोजाना चार हजार रुपये तक का नुकसान झेलने के बाद वह फिर मुनाफे की ओर चल पड़े हैं। कहते हैं बड़ी मुश्किल से मार्च से सितंबर का समय कटा है। अब बाजार कुछ बेहतर है। कोरोना काल में अंडा और मुर्गी को लेकर कई तरह के शक उठाए गए लेकिन अब लोग दोबारा से इसके स्वाद और पौष्टिकता की ओर मुड़ गए हैं। शेखर कहते हैं कि अगर सरकार अंडा पाउडर बनाने का प्लांट (अनुमानित कीमत सवा करोड़ रुपये) लगवा दे तो अंडा उत्पादकों को बिक्री न होने स्थिति में पाउडर बनाने का मौका मिलेगा और उसे विदेशों में भेजा जा सकता है, जहां अंडे नहीं होते हैं। इस तरह ये घरेलू उद्योग का बड़ा रूप ले सकता है। अभी तक केवल बरेली स्थित आईवीआरआई में ये सुविधा है।
उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति में अलीगढ़ में 20 यूनिट लगीं
-30 हजार पक्षियों की कुक्कुट लेयर इकाई की लागत 1.80 करोड़ आंकी जाती है। इसमें बैंक से 1.26 करोड़ रुपये का कर्ज मिलता है। लाभार्थी अंश 54 लाख है, पांच वर्ष के लोन में उसको ब्याज में 40 लाख की राहत मिलती है। जिले में ऐसी 10 यूनिट हैं।
-10 हजार पक्षियों की कुक्कुट लेयर इकाई की लागत 70 लाख रुपये आंकी गई है। इसमें बैंक से 49 लाख रुपये का कर्ज मिलता है। लाभार्थी अंश 21 लाख है। पांच वर्ष के लोन में उसको ब्याज में 13.33 लाख की राहत मिलती है। जिले में ऐसी आठ यूनिट हैं।
-10 हजार पक्षियों की कुक्कुट ब्रायलर इकाई की लागत 2.6 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें बैंक से 1.45 करोड़ रुपये का कर्ज मिलता है। लाभार्थी को 61.50 लाख लगाने होते हैं। पांच वर्ष की ऋण अवधि में उसको ब्याज में 45 लाख की राहत मिलती है। जिले में दो यूनिट हैं।
अंडे का फंडा
-3.52 रुपये एक अंडे की लागत आती है।
-4.65 रुपये प्रति अंडे का होलसेल रेट है।
-एक मुर्गी 110 से 115 ग्राम दाना रोजाना खाती है।
-एक अंडे का औसत वजन 55 से 60 ग्राम होता है।
-मुर्गी रोज जितना दाना खाती है, उससे आधे वजन का अंडा देती है।
-24 से 28 घंटे में एक मुर्गी एक ही अंडा देती है।
-श्राद्ध पक्ष व नवरात में एक रुपये तक भाव गिर जाता है।
-41 रुपये में एक छोटी मुर्गी पालने के लिए आती है।
-मुर्गी 100 हफ्ते बाद अंडा देना शुरू कर देती है।
-अंडा वाले लेयर और चिकन उत्पादन वाले ब्रायलर फार्म कहलाते हैं।
-केवल अंडे देने वाली मुर्गी चिकन के रूप में 20 रुपये किलो के भाव से बिकती है।
-अंडा और चिकन दोनों में काम आने वाली मुर्गा मुर्गी 80 रुपये किलो तक हैं।
-कॉक-400, कॉक-100 और काक 400 वाई प्रजाती चिकन के लिए उत्तम हैं।
-बीबी 300 और बोमेन्स केवल अंडा उत्पादन के लिए है।
-सरकार की ओर से प्रति मुर्गी या मुर्गा 1.20 रुपये में बीमा होता है।
-मुर्गा-मुर्गी का दाना वर्तमान में 24 रुपये प्रति किलो के भाव में है।
-अलीगढ़ में साढ़े चार लाख अंडे प्रतिदिन की औसत खपत होती है।
-अलीगढ़ में वर्तमान में बरनाला से सर्वाधिक अंडे की आमद होती है।
-जिले में वर्तमान दो लाख 10 हजार अंडों का प्रतिदिन उत्पादन है।
नोट: एक अंडे में 6 ग्राम प्रोटीन, पांच ग्राम वसा, 0.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है, जो कुल 71 कैलोरी बनाता है।