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बेटी ने दर्ज कराई बाप पर हत्या की रिपोर्ट..भेजा जेल

Mon, 18 Apr 2016 01:49 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
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हत्‍या
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महानगर के नौरंगाबाद की शास्त्री नगर गली नंबर 5 में पति के हाथों मारी गई आशा की हत्या के जुर्म का मुकदमा बेटी ने अपने बाप के खिलाफ दर्ज करा दिया है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इधर, रविवार को दिन में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। वहीं इस हत्या के बाद इलाके में एक्सपोर्टर परिवार के उस चौहरे हत्याकांड की चर्चाएं रहीं और लोग यही कहते सुने गए कि उसी हत्याकांड ने इस परिवार में कलह की नीव रखी। यह कलह आज इस नतीजे पर पहुंची है।
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वाकया शनिवार रात का है, जब पेशे से मजदूर सुनील ने अपनी पत्नी आशा शर्मा की मौंगरी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद सुनील ने खुद पुलिस को फोन किया और खुद ही पुलिस के हवाले हो गया था। इस हत्या के मूल में पुलिस जांच में पारिवारिक कलह ही सामने आई।
इसके बाद आशा की बेटी प्रियंका ने जो पुलिस को बताया, उस कहानी पर परिवार ने भी सुर में सुर मिलाया। प्रियंका व परिवार के अन्य सदस्यों की मानें तो मां व पापा दोनों एक दूसरे पर शक किया करते थे। चौहरे हत्याकांड में मां के तीन साल जेल में रहने के दौरान पिता के किसी अन्य महिला से रिश्ते हो गए थे।
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वहीं पिता का कहना था कि खुद के गलत रिश्तों के चलते उस पर चौहरे हत्याकांड की साजिश का आरोप लगा था। मां के जेल से छूटकर आने के बाद दोनों में इस कदर कलह रहती थी कि हर दिन झगड़ा होता था। इसी झगड़े के चलते पिता ने रात को मां को मौत के घाट उतार दिया।
एसओ गांधीपार्क संजय पांडेय के अनुसार प्रियंका की इसी कहानी पर आधारित तहरीर पर सुनील के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है। वहीं शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। फिलहाल प्रियंका व गोलू चाचा-दादी के साथ ही रह रहे हैं।
16 अप्रैल को ही हुआ था चौहरा हत्याकांड
इसे संयोग ही कहा जाएगा कि महानगर के गांधीनगर इलाके के कीर्ति एक्सपोर्ट परिवार में चौहरा हत्याकांड भी 16 अप्रैल 2009 को हुआ था। इस हत्याकांड में एक्सपोर्टर महेश की पत्नी व तीन बेटियों को इसी तरह बेरहमी से सिर कुचलकर या चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतारा गया था। इस हत्याकांड में आशा पर हत्या की साजिश का आरोप लगा था और उस सहित सात लोग जेल गए। 2011-2012 में अदालत ने आशा को बरी करते हुए बाकी आरोपियों को उम्रकैद से दंडित किया। साथ ही कीर्र्ति एक्सपोर्ट के स्वामी महेश की भूमिका के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए थे। इधर, अब उसी दिन 16 अप्रैल को 7 सात साल बाद आशा की हत्या को लोग कुदरत का हिसाब मानकर चर्चा कर रहे थे और कह रहे थे कि बेशक महेश की गवाही के दम पर आशा बरी हो गई। मगर कुदरत ने उसे बरी नहीं किया।
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