गांव नगला मैया में किसान ने गोवंश की रखवाली के लिए बनाई मचान
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पूस की सर्द रात। शाम ढले ही लोग गर्म कपड़ों में पैक हो जा रहे हैं। ठंडी हवाओं से बचने के लिए घर के दरवाजे खिड़कियां बंद कर दी जाती हैं। वहीं किसान छुट्टा गोवंश से फसलों को बचाने के लिए रात भर पहरेदारी कर रहे हैं। खेतों की तरफ आने वाले पशुओं के झुंड को दौड़ाते हैं। किसानों ने खेत पर मचान बना रखीं हैं। पूरी रात इसी मचान पर बीत जा रही है।
जलाली क्षेत्र के गांव गुरुसिकरन निवासी बुजुर्ग सूरजभान 16 दिसंबर की रात आठ बजे अपने खेत में बनाई गई मचान पर बैठे थे। बोले पूरी रात यहीं रहेंगे। ताकि छुट्टा पशु उनकी फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। जलाली क्षेत्र के गांव नगला बघेल निवासी अमर सिंह भी रात आठ बजे अपने खेत पर बनी मचान के ऊपर पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि 25 बीघे खेत में गेहूं की फसल खड़ी है। खेतों के चारों ओर तारकसी भी कर रखी है। लेकिन पशु फिर भी घुस ही आते हैं। लिहाजा खेत पर रहना पड़ता है।
दादों के गांव कसेर निवासी किसान विद्याराम ने बताया कि उन्होंने दो बीघे खेत में गेहूं की फसल है। अगर एक भी रात को खेत पर न पहुंचे तो पशु फसल को बर्बाद कर देंगे। गांव नगला उदित निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि वह अपने भांजे की करीब 35 बीघे की फसल की रखवाली के लिए रात खेत में बनी मचान पर बिता रहे हैं। गांव नगला पारसी में काफी संख्या में निराश्रित गोवंश एकत्र रहते हैं। वह रात के समय खेतों में घुसकर फसल को नष्ट करते हैं। इनसे फसलों की देखभाल के लिए रात में जगना पड़ रहा है। खैर के गांव ककोला निवासी किसान राकेश शर्मा, गांव अंडला के शिवकुमार रावत भी मचान पर ही रात बिता रहे हैं।