गभाना क्षेत्र में खेत मे खड़ी कपास की फसल।
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अलीगढ़। खेतों में अब पारंपरिक धान-गेहूं की फसलों के साथ कपास की सफेदी भी नजर आने लगी है। पिछले साल कपास के अच्छे भाव ने किसानों का भरोसा लौटाया तो इस बार जिले में कपास का रकबा 3058 हेक्टेयर तक बढ़ गया।
विश्व स्तर पर सात अक्तूबर को कपास दिवस मनाया जाएगा। यह कपास के महत्व को पहचानने के लिए मनाया जाता है। जिले में पिछले साल 2420 हेक्टेयर में कपास बोई गई थी, जो इस बार बढ़कर 5478 हेक्टेयर हो गई है। गभाना, चंडौस और बरौली क्षेत्र में किसानों ने पारंपरिक फसलों से हटकर कपास की खेती को तवज्जो दी है।
उधर, सर्दी शुरू होने से पहले ही मंडी में अगैती कपास की आवक भी शुरू हो गई है। देसी कपास करीब 7000 रुपये और अमेरिकी कपास 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। अच्छी कीमत मिलने से किसानों के चेहरे खिले हैं। मंडी से कपास स्थानीय मिलों में भेजी जाएगी, जहां इससे रूई तैयार होगी।
गभाना के गांव पैराई के किसान राहुल सिंह गुड़िया ने बताया कि पहले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कपास होती थी, लेकिन भाव गिरने पर किसानों ने दूसरी फसलों का रुख कर लिया। पिछले साल अच्छे दाम मिले तो उन्होंने इस बार करीब 15 हेक्टेयर में कपास बोई। अब शुरुआती आवक में ही बेहतर भाव मिलने से उम्मीद बढ़ी है। बलवंत नगलिया के किसान धर्मेंद्र सिंह के मुताबिक इस बार पैदावार अच्छी हुई है और लागत के मुकाबले बेहतर कीमत मिल रही है।
जिले में किसानों ने इस बार बड़ी संख्या में कपास की खेती की है। पिछले साल कपास के अच्छे भाव ने परंपरागत फसलों की बजाय किसानों का रुख कपास की ओर लाैटाया है। इससे फसल का रकबा 5478 हेक्टेयर हश्गया गई है। बाजार में फसल की अच्छी कीमत भी मिल रही है।
- धीरेंद्र कुमार चाैधरी, जिला कृषि अधिकारी