फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे के अलीगढ़ से गाजियाबाद सेक्शन के बीच फर्जीवाड़ा

Mon, 01 Apr 2013 12:58 PM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
एमएसटी (मंथली सीजन टिकट) के माध्यम से ट्रेनों में यात्रा करने वाले लोग सतर्क हो जाएं। आप जिस एमएसटी से यात्रा कर रहे हैं वह फर्जी हो सकती है। रेलवे की आंतरिक जांच में यह खुलासा हो रहा है।
विज्ञापन


टिकट विंडो पर तैनात बाबू बहुत ही तकनीकी तरीके से यह फर्जीवाड़ा कर रेलवे को लाखों का चूना लगाकर अपनी जेबें भर रहे हैं। साथ ही यात्रियों से भी धोखा कर रहे हैं। यह खेल अलीगढ़ से गाजियाबाद सेक्शन तक चल रहा है।

बाबुओं का खेल कुछ इस तरह होता है कि एमएसटी बना कर मुसाफिर को दे दी जाती है और सिस्टम में इसे कैंसिल दिखा कर पैसे अपनी जेब में रख लिए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार रेलवे को अंदरखाने इसकी शिकायत मिली है, इसलिए विभाग इसकी आंतरिक जांच करवा रहा है।
विज्ञापन


हालांकि कोई भी अधिकारी अभी इस मामले में खुलकर नहीं बोल रहा है। यह खेल अलीगढ़ से गाजियाबाद के बीच पड़ने वाले छोटे स्टेशनों पर ज्यादा हो रहा है।

रेलवे के जानकारों की मानें तो यह इतनी सफाई से किया जाता है कि साधारण जांच में इसको पकड़ना मुश्किल है। हाल ही में ट्रेन के सफर के दौरान ऐसी एमएसटी पकड़ी भी गई हैं लेकिन जांच पूरी न हो पाने के कारण अभी कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है।

ऐसे होता है फ्रॉड
सिकंदरपुर स्टेशन पर एक बुकिंग क्लर्क ने 970 नंबर की पांच रुपये की टिकट बनाने के लिए कंप्यूटर को कमांड दिया लेकिन इसे छपने नहीं दिया। जिससे टिकट का रोल सादा रह गया।

इसी टिकट पर उसने सिकंदरपुर से गाजियाबाद की एमएसटी 465 रुपये में बनाई। एमएसटी बना कर मुसाफिर को दे दी गई और पैसे ले लिए गए। इसके तुरंत बाद 971 नंबर की टिकट पर इस एमएसटी को कैंसिल कर दिया गया।

जिससे सिस्टम में 465 रुपये कम हो गए। रेलवे को चूना लग गया और मुसाफिर को एमएसटी देकर बाबू ने पैसे अपनी जेब में रख लिए।

ऐसे करें जांच
एमएसटी लेने के अगले ही दिन आप बुकिंग क्लर्क से अपने एमएसटी नंबर की जांच करवाएं, अगर उस नंबर की एमएसटी सिस्टम में दर्ज है तो सही है यदि कैंसिल दिखा रही है तो आपके साथ फ्रॉड हुआ है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें