अलीगढ़ महानगर की गांधीपार्क पुलिस द्वारा पकड़ा गया फर्जी दरोगा बाहर की बात तो छोड़ो घर में भी फर्जीवाड़ा किए बैठा था। उसने 2018 में सासनी गेट इलाके की युवती से खुद को दरोगा बताकर ही शादी की थी। सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत युवती का पिता भी उसके झांसे में आ गया।
पर आज तक वह अपनी पत्नी को अपनी तैनाती बताने वाले जिले में नहीं ले गया। हालांकि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी को उस पर शक हो गया था। मगर वह चुप रहती थी। एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत ने बताया कि युवक के पिता की 2016 में मौत हुई।
उसके बाद उसने घर से पैर निकाल दिया और 2017 में जाकर गांव के अलावा क्षेत्र में वह दरोगा के रूप में पहचाना जाने लगा। अपनी पोस्टिंग वह कभी आगरा, कभी कानपुर, कभी बस्ती तो कभी एसटीएफ में बताता। कभी यह बताता कि इन दिनों जीआरपी में तैनात है।
जब उसकी 2018 में सासनी गेट इलाके की युवती से शादी हो गई तो उसका ज्यादातर समय अलीगढ़ में ही बीतने लगा। पत्नी को उस समय शक होना शुरू हो गया, जब उसे समय पर वेतन नहीं मिलता था। वह तरह-तरह के बहाने बनाने लगता था। हर बार किसी न किसी वजह से उसका वेतन देरी से आता था। घर में भी दिक्कत होने लगी थी। एक बेटा भी पैदा हो गया।
वह यहां दरोगाओं व सिपाहियों के बीच मिलना जुलना रखता था। साथ में स्टेशन पर भी आना-जाना रखता था। कहता था कि छुट्टी पर आया हुआ है। पुलिस के बीच उठना-बैठना देख और वर्दी पहने होने के कारण लोग उसे काम भी देने लगे। पुलिस जांच के अनुसार ताजा समय में धनीपुर क्षेत्र में उसने 10 से 15 लोगों को चूना लगाया।
इसी तरह की शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं कि विनोद नाम के फलां दरोगा ने काम कराने के नाम पर रुपये ले लिए हैं। इस पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि वह फर्जी है।
पकड़े जाने पर नहीं बता सका पीएनओ
पुलिस में हर कर्मचारी का एक पीएनओ नंबर होता है। वह नंबर पहली ज्वाइनिंग के समय ही मिलता है और आजीवन रहता है। मंगलवार रात इंस्पेक्टर हरिभान सिंह राठौर ने जब उसे रोका तो वह वर्दी पहने हुए था और जब उससे पीएनओ नंबर पूछा तो वह नंबर नहीं बता सका। इस पर इंस्पेक्टर ने तल्ख लहजे में उसे गाड़ी में बैठाकर थाने पहुंचाया।