इधर, एनआईए की टीम का अलीगढ़ में डेरा जमा हुआ है। वह कैंपस में उसकी गतिविधियों का ब्योरा तलाशने में लगी है। इसी क्रम में एएमयू के उसकी कक्षा से जुड़े प्रोफेसरों व अधिकारियों से भी पूछताछ हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि उनसे पूछताछ का इशारा हो गया है, ताकि तस्वीर साफ हो सके। इसी क्रम में उसे अलीगढ़ लाने के भी संकेत मिल रहे हैं।
एटीएस का संदेह..जरूर कोई मददगार और उसका नेटवर्क
बेशक फैजान ढाई माह पहले यहां से चला गया। उसके अलीगढ़ में किसी दोस्त या करीबी के विषय में जानकारी नहीं मिली है। मगर एटीएस को उसकी गतिविधियों, हरकतों आदि को लेकर इस बात का अंदेशा है कि उसका कोई न कोई मददगार यहां जरूर है। साथ में उसके नेटवर्क का सदस्य भी जरूर है। तभी तो वह अचानक यहां आया और चला गया। आसानी से उसे किराये पर कमरा मिल गया। हॉस्टल आवंटित न होने पर भी वह यहां आसानी से रहा। डार्कवेब नेट के जरिये अपने संपर्कों से जुड़ा रहा।
एक छात्र की वजह से कैंपस की बदनामी क्यों
इस विषय में एएमयू परीक्षा नियंत्रक प्रो.मुजीबुल्लाह जुबैरी ने सोमवार को मीडिया के सवाल पर कहा कि एक छात्र की वजह से कैंपस को बदनाम क्यों किया जा रहा है। एएमयू की इतनी उपलब्धियों को उसके सामने क्यों दबाया जा रहा है। वे कहते हैं कि तीस हजार छात्रों में से एक छात्र की गतिविधि ऐसी हैं तो उसमें एएमयू का क्या दोष है।