फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिसने हमारे परिवार को बर्बाद किया, उसकी कमाई नहीं चाहिए

Thu, 01 Aug 2019 02:02 AM IST
राजेश सिंह अभिषेक शर्मा अलीगढ़।
विज्ञापन
आलोक सिंह - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
दुश्मन की कमाई शायद ही कोई गैरतमंद लेता हो। जिला कारागार में अलग-अलग अपराधों में आरोपी कैदियों की कमाई भी वापस आ रही है। हाल ही में ऐसे चार मामले सामने आए हैं। जिसमें कैदी की कमाई को उसके पीड़ित परिवारों ने ठुकरा दिया है। इन परिवारों ने जिला कारागार को चेक वापस भेजते हुए यही तर्क दिया है कि जिसके अपराध की वजह से हमारे परिवार को दर्द मिला, उसकी मेहनत की कमाई में से हमें मरहम का प्रतिकर नहीं चाहिए। यह चेक वापस आने के बाद कारागार प्रशासन की ओर से रकम वापस कैदियों के खाते में ही शामिल कर दी जा रही है।  
विज्ञापन

कारागार नियम पर गौर करें तो यहां सजायाफ्ता कैदियों से उनकी योग्यता और अनुभव के अनुसार काम लिया जाता है। इसके बदले उन्हें 25 रुपये प्रतिदिन मेहनताना देने का प्रावधान है। इस मेहनताने का भुगताना सालाना या तो सीधे कैदी को या उसके द्वारा बताए गए परिजन को किया जाता है। इसमें रकम में से कुल 15 फीसदी रकम उस कैदी के द्वारा किए गए अपराध के पीड़ित को देने का नियम है। मगर कुछ परिवार दुश्मन की इस कमाई को लौटा दे रहे हैं। ऐसे ही चार केस हाल ही में सामने आए हैं।

1- वर्ष 1989 से संबंधित हत्या के मुकदमे में अशोक, रिषीपाल और भोजराज उर्फ पप्पू निवासी हाथरस गंगचौली को सजा हुई जो कुछ माह पहले तक जेल में थे, फिर रिहा हो गए। इनके अपराध से पीड़ित इन्हीं के गांव की प्रेमवती है। कारागार प्रशासन ने 15 दिसंबर 2017 को तीनों के मेहनताने में से 5838 रुपये प्रेमवती को भेजे गए, जो 11 जनवरी 2018 को वापस आ गए।
विज्ञापन

2- वर्ष 2007 से संबंधित हत्या के ही मुकदमे में जमील और हाकम निवासी सासनी हाथरस को सजा हुई। इनके अपराध की पीड़ित पुष्पा देवी निवासी नगला भीखा सासनी को दिसंबर 2017 को 2148 रुपये भेजे गए। यह पैसा भी 8 जनवरी 2018 को वापस आ गया।
3- वर्ष 2008 से संबंधित दुष्कर्म के मुकदमे में गीतम निवासी विजयगढ़ को सजा हुई। इसका पीड़ित विजयगढ़ क्षेत्र का ही परिवार है। इस परिवार को दिसंबर 2017 को 1384 रुपये भेजे गए, जो तीन जनवरी 2018 को वापस आ गए।
4- वर्ष 2001 से संबंधित डकैती के मुकदमे में भूप सिंह और कालीचरण को सजा हुई है। इनका पीड़ित रामप्रकाश निवासी ब्रह्मपुरी पुरदिलनगर सिकंदराराऊ है। उसको 28 सितंबर 2018 को 1546 रुपये भेजे गए। जो 21 फरवरी 2019 को वापस आ गए। 


यह भी जानें -
- 25 रुपये प्रतिदिन किसी भी कैदी को जेल में काम करने का मेहनताना मिलता है। 
- 15 फीसदी रकम इसमें से प्रत्येक साल में कैदी के पीड़ित परिवार को दी जाती है। 
- 250 कैदी जिला कारागार में करते हैं काम और उन्हें दिया जाता है मेहनताना भी।
- 100 से अधिक कैदियों के प्रकरणों में कैदी के पीड़ित को भेजा जाता है प्रतिकर।
 

कारागार प्रशासन द्वारा नियमानुसार कैदियों के अपराध पीड़ित को यह प्रतिकर भेजा जाता है। मगर इन चार मामलों में रुपये वापस आ गए हैं और यही तर्क दिया गया है कि दुश्मन की कमाई उन्हें नहीं चाहिए। अब यह रकम कैदियों के खातों में शामिल कर दी गई है।

विज्ञापन

- आलोक सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक कारागार

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें