एकमात्र सर्जन बचे हैं, जिनकी मदद से एक दिन ओपीडी और एक दिन ऑपरेशन कराया जा रहा है।पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त अस्पताल की बात करें तो कभी यहां 18 स्थायी डॉक्टर थे। बृहस्पतिवार को ही अपर निदेशक स्तर से जल्द एक फिजीशियन की तैनाती का भरोसा मिला है।दोनों अस्पतालों में नहीं चर्म रोग के डॉक्टर, निजी अस्पतालों में भीड़जिला स्तर के इन दोनों अस्पतालों में चर्म रोग के डॉक्टर नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर बताते हैं कि इस बारिश के मौसम में भीगना, गंदे पाने में गुजरना और गीले कपड़े पहनना चर्म रोग को बढ़ावा देता है।
प्रदेश स्तर पर डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों के बाद जिले के प्रमुख अस्पताल मलखान सिंह जिला अस्पताल व दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त अस्पताल के हालात सुधर नहीं रहे। काफी प्रयास के बाद भी इन दोनों अस्पतालों को जरूरी डॉक्टर नहीं मिले। ऐसे में अब दीनदयाल अस्पताल में नेत्र विभाग में काम पूरी तरह बंद हो गया। जिला अस्पताल में बिना फिजीशियन के सामान्य मरीजों का उपचार संभव नहीं हो पा रहा। इसके अलावा बच्चों की देखरेख करने वाले डॉक्टर व एनस्थेटिक का न होना भी परेशानी का कारण बना हुआ है। एकमात्र सर्जन बचे हैं, जिनकी मदद से एक दिन ओपीडी और एक दिन ऑपरेशन कराया जा रहा है।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त अस्पताल की बात करें तो कभी यहां 18 स्थायी डॉक्टर थे। तबादले के बाद 10 स्थायी व 4 संविदा डॉक्टर रह गए हैं। अन्य सेवाओं को तो जैसे तैसे चलाया जा रहा है। मगर नेत्र रोग विभाग में काम पूरी तरह बंद हो गया है। सीएमएस डा.अनुपम भाष्कर स्वीकारते हैं कि इन दिनों अस्पताल में नेत्र रोग विभाग में काम बंद हो गया है। बाकी अन्य सभी विभागों में मरीजों को जैसे-तैसे उपचार दिया जा रहा है। उच्च स्तर पर वार्ता की जा रही है।
इधर, मलखान सिंह जिला अस्पताल की स्थिति को देखें तो यहां भी 18 स्थायी व 5 संबद्ध डॉक्टर हुआ करते थे। दो कार्डियोलाजिस्ट, दो फिजीशियन व एक चेस्ट फिजीशियन के तबादले के बाद एकमात्र फिजीशियन डॉ.एसके वर्मा इनसे जुड़े मरीजों को देख रहे थे। मगर डॉ.वर्मा को कार्यमुक्त करना पड़ गया। इसके बाद से यहां इनसे जुड़े मरीजों का उपचार मुश्किल हो रहा है। दो सर्जन की जगह मात्र एक सर्जन बचे हैं, जबकि एनस्थेटिक हैं नहीं। ऐसे में इन दिनों सर्जरी भी सही ढंग से नहीं हो पा रही हैं। बच्चों के रोग से जुड़े डॉक्टर का भी अभाव है। इस विषय में सीएमएस डा.ईश्वर देवी बत्रा बताती हैं कि वे लगातार शासन व निदेशालय स्तर पर संपर्क में हैं। पत्राचार किए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को ही अपर निदेशक स्तर से जल्द एक फिजीशियन की तैनाती का भरोसा मिला है।
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दोनों अस्पतालों में नहीं चर्म रोग के डॉक्टर, निजी अस्पतालों में भीड़
जिला स्तर के इन दोनों अस्पतालों में चर्म रोग के डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में इस बारिश के मौसम में चर्म रोग के मरीज निजी डॉक्टरों के सहारे हैं या फिर जेएन मेडिकल कॉलेज में जाकर उपचार लेने को मजबूर हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर बताते हैं कि इस बारिश के मौसम में भीगना, गंदे पाने में गुजरना और गीले कपड़े पहनना चर्म रोग को बढ़ावा देता है। ऐसे में इन सभी से बचने की जरूरत है।