जाफरी ड्रेन और अलीगढ़ नाले का गंदा पानी बायोरेमेडिएशन पद्धति से साफ कर सिंचाई के लिए उपयोगी बनाया जाएगा। इस पद्धति में वैक्टीरिया सूक्ष्म शैवाल, वकक और पौधों को पानी में डाल कर हानिकारक तत्वों को खत्म किया जाता है।
इसमें एक कत्रिम प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे पानी में रहने वाल जीवों को दोबारा से जीवित कर पानी को साफ किया जाता है। इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद इन नालों में मछलियां भी दिखेंगी। इगलास रोड, मुकुंदपुर, मथुरा नगर, अलीगढ़ ड्रेन, जाफरी ड्रेन के गंदे और काले पानी को इस तकनीकी से साफ और ऑक्सीजन युक्त बनाने की कवायद की जा रही है।
महाप्रबंधक जल अनवर ख्वाजा ने बताया कि नालों में बहने वाले खराब पानी में माइक्रो न्यूट्रेंट है। इस पानी में मल मूत्र, बैक्टीरिया, तेल, शैंपू, यूरिन जैसे हानिकारक तत्व हैं। जिसकी वजह से इस पानी में सीओडी, बीओडी, डीओ और टीएसएस तत्वों की अधिकता हो जाती है। इन तत्वों को कम कर पानी को साफ कर दिया जाएगा। जब पानी में मछलियां और दूसरे जीव आसानी से रह सकेंगे तो पानी साफ होने लगेगा। नगर आयुक्त अमित आसेरी ने बताया कि उक्त पद्धति से खराब पानी काे दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जा सकेगा। इगलास रोड पंपिंग स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में दूषित पेयजल से किसानों द्वारा सिंचाई की जाती थी, लेकिन अब साफ पानी से सिंचाई हो सकेगी। ब्यूरो