बाबा बर्फानी अपने भक्तों की उनकी जमकर परीक्षा ले रहे हैं। बालटाल से 14 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा बर्फानी के दर्शन करने की हसरत लेकर जा रहे भक्तों को अब बालटाल से 34 किलोमीटर पैदल सफर करके ही बाबा के दर्शन होंगे। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने बालटाल पर मौजूद यात्रियों को पहलगांव तक ले जाने की व्यवस्था की है। रास्ता अवरुद्ध होने के कारण यात्रियों को 10 से 20 रुपये कीमत वाली पानी की बोतल 200 रुपये तक की खरीदनी पड़ रही है। बावजूद इसके बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए जाने वालों की संख्या और उत्साह में कोई कमी नहीं है। शुक्रवार को धौर्रामाफी से प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी राजकुमार अपने 55 सदस्यीय जत्थे के साथ यात्रा के लिए रवाना हो गए।
बालटाल कैंप के सेवादार अजय जलैसरिया ने बताया कि भूस्खलन के कारण प्रशासन ने बालटाल वाला रास्ता दो दिन के लिए बंद कर दिया है। अब यात्रियों को पहलगांव होते हुए बाबा के दर्शनों के लिए यात्रा को जाना पड़ रहा है। बालटाल से गुफा तक की दूरी 14 किलोमीटर है, जबकि पहलगांव से यह दूरी 34 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि बालटाल वाले रास्ते पर बने भंडारों में राशन सामग्री की परेशानी खड़ी हो गई है। बकौल अजय जलैसरिया दर्शनों के बाद लौट रहे यात्रियों का कहना है कि ऊपर एक लीटर पानी की बोतल 200 रुपये तक की बेची जा रही है।
धौर्रामांफी से 55 सदस्यीय जत्था शुक्रवार को हुआ रवाना
बारिश भूस्खलन होने के बाद भी बाबा बर्फानी के दर्शनों को जाने वाले भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। धौर्रामांफी से हर साल बाबा बर्फानी के दर्शनों को जाने वाले राजकुमार ने बताया कि वह इस बार भी दर्शनों के लिए जा रहे हैं। शुक्रवार की शाम को वह अपने 55 सदस्यीय जत्थे के साथ बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए रवाना हो गए। जब उनसे यात्रा में कठिनाइयों के बारे में पूछा तो कहा कि बिना कठिनाइयों के बाबा के दर्शन करने में मजा भी नहीं आता है। बाबा बर्फानी जितनी ज्यादा परीक्षा लेते हैं दर्शन करने में उतना ही आनंद आता है।
यात्री और बस चालक के बीच हो रही तू-तू मैं-मैं
बाबा बर्फानी के लिए दर्शन को बस की 12 दिन की बुकिंग करके ले गए यात्रियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। यात्री बिना दर्शनों के लौटना नहीं चाहते हैं जबकि बस चालक बुकिंग की तारीख का हवाला देकर लौटना चाहता है। इसके कारण कई बार झगड़े की नौबत तक आ जाती है। बस चालक रुकने का अतिरिक्त भाड़ा चाहता हैं जबकि यात्री देने को तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि कुछ लोग बाबा बर्फानी के दर्शनों के स्थान पर मां वैष्णो देवी के दर्शन करके ली लौटने का मन बना रहे हैं।
बारिस और भूस्खलन आम बात डरने की जरूरत नहीं
अमरनाथ जाने वाले यात्री किसी भी भूस्खलन और आपदा संबंधी सूचनाओं से भ्रमित न हों। यात्रा के दौरान बारिश एवं भूस्खलन होना आम बात है, प्रत्येक साल ऐसा होता है।
यह बात भगवान गौरीशंकर लंगर के प्रधान सेवादार तथा लंगर एसोसिएशन के महामंत्री विकास शर्मा ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से कही है। भूस्खलन सामान्य बात है इसका भोले के भक्तों के उत्साह पर कोई असर नहीं पड़ता। इन आपदा पर सेना और लंगरों के सेवादारों के सहयोग से कुछ ही घंटों में काबू पा लिया जाता है। सभी लंगरों पर लगभग डेढ़ माह की खाद्य सामग्री होती है। उन्होंने बताया कि संगम क्षेत्र में सेना की हैलीकॉप्टर रेस्क्यू टीम तैनात है। जो 16 किमी के बालटाल के रास्ते पर ड्रोन कैमरे और सेटेलाइट के माध्यम से पैनी नजर रखती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पांच साल तक के बच्चों को लेकर अमरनाथ की यात्रा करना वर्जित है। यह बात रजिस्ट्रेशन के वक्त बताई जाती है। ऐसे में माता-पिता छोटे बच्चों के साथ यात्रा पर जा रहे हैं तो इनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलना चाहिए।
11 को पन्नालाल चैरिटेबिल ट्रस्ट की जाएगी बस
बाबा बर्फानी भक्त मंडल के संरक्षक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि पन्नालाल चैरिटेबिल ट्रस्ट की ओर से 11 जुलाई अमरनाथ यात्रा के लिए बस जाएगी। इसकी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। यात्रियों को सूचना संबंधी आई कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उनका बीमा भी कराया जा रहा है।