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सम्मान न मिलने से क्षुब्ध चौधरी महेंद्र सिंह ने रालोद छोड़ी, बसपा में वापसी की अटकलें

Wed, 12 Jun 2019 01:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
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महेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मंत्री चौधरी महेंद्र सिंह ने छह महीने में ही राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय सचिव पद से व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सदस्यता से इस्तीफा देने की वजह उन्होंने पार्टी में अनुशासन की कमी और जाटव की उपेक्षा बतायी है। 

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वर्ष 2007 में बसपा शासनकाल में मंत्री रहे चौ. महेंद्र सिंह को बसपा ने अनुशासनहीनता व सदस्यता शुल्क न जमा करने के आरोप में 3 जनवरी 2018 को निष्कासित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। 30 नवंबर 2018 को दिल्ली में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित सिंह के समक्ष पार्टी की सदस्यता ली थी। 

छह महीने में ही पार्टी की सदस्यता छोड़े जाने को लेकर सियासी गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। एकाएक लिए गए पूर्व मंत्री के फैसले को कुछ बसपा में वापसी से जोड़ रहे हैं। हालांकि, पूर्व मंत्री ने इस तरह के अटकलों पर यह कहकर विराम लगा दिया कि मैं पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता हूं। 
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चौ. महेंद्र वर्ष 2002 व 2007 में लगातार कोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। वह मायावती सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। वर्ष 2012 में उन्हें तो पार्टी ने टिकट नहीं दिया, लेकिन उनकी पत्नी राजरानी को खैर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था। मगर, राजरानी को चुनाव में सफलता नहीं मिल पायी थी। कांशीराम जब पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से पार्टी के अध्यक्ष बने, तब वह पार्टी के डेलीगेट मेंबर थे। पार्टी ने उन्हें दिल्ली से वर्ष 1993 में नसीरगंज विधानसभा का चुनाव लड़वाया था। 

दोबारा पार्टी ने चौ. महेंद्र को वर्ष 1998 में मंगोलपुरी दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़वाया। उस समय वह दिल्ली में अपना कारोबार करते थे। बसपा ने जब उन्हें वर्ष 2018 में अनुशासनहीनता के चलते निष्कासित किया था, तभी उनका दूसरी पार्टी में जाने की चर्चाएं थीं। फिर भी इन चर्चाओं को वह बिना सिर-पैर की चर्चा बता रहे थे। मगर अगले छह महीने में रालोद का हैंडपंप चलाने लगे। एक बार फिर वही बात कह रहे हैं, कहीं न जा रहा हूं।

सम्मान न मिलने से थे आहत
लंबे समय से सम्मान न मिलने से पूर्व मंत्री चौ. महेंद्र सिंह आहत थे। लोकसभा चुनाव में उन्हें तवज्जो नहीं मिली, जो मिलनी चाहिए। न तो गठबंधन प्रत्याशी के मंच को साझा करने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया और न ही कोई उनसे राय ली गई। सूत्रों का कहना है कि रविवार को हुई पार्टी की समीक्षा बैठक में उनसे अभद्रता भी गई थी।

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