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साक्ष्यों ने पलटी सफेदपोश चेयरमैन की आपराधिक बाजी

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अभिषेक शर्मा
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एक सफेदपोश ने पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ व उनके पूर्व ब्लाक प्रमुख बेटे की ऐसी फुलप्रूफ साजिश रची कि खुद पर आंच तक न आए। मगर मसला सियासी होने के कारण पुलिस ने एक-एक कदम फूंक - फूंककर रखा। जब चेयरमैन को हिरासत में लिया तो उसने उल्टा पुलिस पर सवाल उछाला कि अगर कोई साक्ष्य हो तो बताओ। वह जेल जाने को तैयार है। बस पुलिस ने उसके सवाल पर राजकुमार जाट से संबंध और लगातार बातचीत, खुद चेयरमैन के कार्यालय में अपराधियों के ठहरने, 13 अगस्त को शूटर बबलू के ड्राइवर को थाने से छुड़वाने जैसे साक्ष्य रखे तो चेयरमैन संजीव अग्रवाल चुप्पी साध गए। इसके बाद और भी बहुत से ऐसे साक्ष्य गिनाए, जिन्हें सुन वह कुछ बोल न पाए।
16 अगस्त को विवाद ने खोला हत्या की तैयारी का भेद
पुलिस सूत्रों के अनुसार 16 अगस्त को सभी शूटर व राजकुमार आदि खैर में फिर से एकत्रित हुए। इस दौरान शूटर राहुल ने स्वीकारा कि वह बुलंदशहर में ब्राह्मण संगठन से जुड़ा है। एक ब्राह्मण को मार नहीं सकता। इस बात पर वहां विवाद हुआ। इस पर राज कुमार ने एडवांस में दिए गए 20-20 हजार व हथियार वापस मांगे और चेतावनी दी कि अगर काम करना है तो बताओ। नहीं तो जाओ। किसी और से करा लेगा। इस डर से राहुल आदि को लगा कि कहीं राज कुमार पुलिस से न पकड़वा दे। इसलिए उस दिन पिता-पुत्र की हत्या करना तय हो गया। ये लोग एक-दो दिन में आने की बात कहकर चले गए। मगर विवाद की भनक किसी तरह प्रमोद गौड़ तक पहुंच गई और वे सीधे एसएसपी से मिलने पहुंचे। शुरुआत में शिकायत को हल्के में लिया गया। इसी बीच एडीएम संग जब एसपी देहात 22 अगस्त को सिंचाई विभाग की जमीन की जांच को गए तो उन्हें वहां कुछ ऐसे तथ्य मिले, जो गंभीर थे। संजीव अग्रवाल भी वहां मौजूद था। हथियार एकत्रित होने की खबर पुलिस को मिली। बस पुलिस यहां से गंभीर हो गई।
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खैर के सीओ से सिपाही तक को न थी भनक
इस मसले की गंभीरता को देख एसएसपी के निर्देश पर तय किया गया कि खैर के सीओ से लेकर सिपाही तक को शामिल न किया जाए। इसी के बाद एसपी देहात व एसओजी टीम खुद विवेचना करते हुए यहां तक पहुंची। जांच में पता चला कि बुलंदशहर के ये सभी अपराधी लंबे समय बाद जेल से छूटे हैं। जिन्हें रुपयों की जरूरत है। इसी क्रम में राज कुमार ने इन्हें शामिल किया है।
जिले में पहले भी हुई हैं सियासी रंजिश में हत्याएं
यह पहला मौका नहीं। अपने जिले में सियासी रंजिश में पहले भी हत्याएं हुई हैं, जिनमें सफेदपोश भी शामिल रहे हैं। कुछ घटनाएं तो ऐसी हैं, जिनमें साजिशकर्ता आज तक उजागर नहीं हुए। इनमें कई दशक पहले भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेहद करीबी ब्रजेंद्र सक्सेना उर्फ बिर्जी सक्सेना की हत्या, राजनीतिक रंजिश में 2006 में पूर्व विधायक मलखान सिंह की हत्या, जमीनी रंजिश में 2014/15 में बसपा के अतरौली से घोषित दावेदार व बिल्डर धर्मेंद्र चौधरी की हत्या, सियासी रंजिश में 2016/17 में टप्पल में भाजपा नेता ज्ञानचंद्र शर्मा ज्ञानी की हत्या।
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सियासी खेमे में चर्चाएं जोरों पर
चेयरमैन संजीव अग्रवाल के इस साजिश के रचने और जेल जाने के बाद जिले के सियासी खेमे में जमकर चर्चाएं हैं। लोग तरह - तरह की बातें कर रहे हैं। इन दिनों चेयरमैन जिले के किन नेताओं के सबसे ज्यादा करीब थे, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
-सिलसिलेवार खुलासा-
मार्च से संजीव अग्रवाल और राजकुमार जाट के बीच चल रही थी हत्या की बात
अगस्त के शुरुआत में हत्या के प्लान को अंतिम रूप दिया गया था यहां पर
6 से 12 अगस्त तक सभी अपराधी खैर में रैकी व हत्या के इरादे से रुके
16 अगस्त को दूसरी एक बार फिर सभी अपराधी खैर में एकत्रित हुए थे
17/18 अगस्त को पूर्व विधयाक ने भेद मिलने पर एसएसपी को बताया
22 अगस्त को एडीएम संग जांच को गए एसपी देहात को कुछ क्लू मिले
26/27 अगस्त को काम करने पर पूरा भेद और साक्ष्य सामने आ गए थे
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