बाबरी मंडी निवासी विनय वाष्र्णेय बताते हैं कि 2014 के बाद से हिंदू परिवारों का पलायन रुका है। 2012 में संजीव शर्मा ने यहां से पलायन किया था, इनके मकान को भी मुस्लिम व्यक्ति ने खरीदा है। विनय बताते हैं कि बाबरी मंडी मोहल्ले से बाहर निकलने के लिए पांच रास्ते हैं, जिनमें पठान मोहल्ला, भुजपुरा, तुर्कमान गेट, शनीचरी पैठ मियां की सराय, पीली कोठी है। शहर में तनाव होने पर एक भी रास्ता सुरक्षित नहीं है, इस कारण लोगों ने यहां से पलायन किया है।
मनीष गुप्ता बताते हैं कि यहां की मोची वाली गली में 50 मोची परिवार थे लेकिन अब एक भी मोची परिवार नहीं रहता। धोबी वाली गली के कुल 40 परिवारों में 20 धोबी परिवार पलायन कर चुके हैं। ठाकुर वाली गली के कुल 35 परिवारों में से 33 धोबी परिवार पलायन कर चुके हैं। इन लोगों के मकानों को मुस्लिम परिवारों ने खरीदा है।
घिरे इलाकों से खुले में पलायन कर गए 200 हिंदू परिवार
- सराय काले खां में अब नहीं रहता कोई हिंदू परिवार
- बाबरी मंडी में 20 हिंदू परिवारों ने बेचे अपने मकान
- मोची वाली गली में अब कोई मोची परिवार नहीं
- धोबी वाली गली से 20 परिवारों ने किया पलायन
- ठाकुर वाली गली में 33 परिवारों ने मकान बेचा
बाबरी मंडी क्षेत्र को 2022 में छोड़ दिया था। इलाके में तंग गलियां हैं। ऐसे में परिवार और कारोबार प्रभावित हो रहे थे। माहौल भी असुरक्षित बना रहता है।- बॉबी मिश्रा, आगरा रोड
असुरक्षित माहौल में रहना बहुत कठिन हो रहा था इसलिए 2021 में बाबरी मंडी क्षेत्र छोड़कर बारहद्वारी क्षेत्र में रहना शुरू किया है।- अतुल वार्ष्णेय, बारहद्वारी
बाबरी मंडी क्षेत्र दंगों से प्रभावित रहा है। ऐसे में सुरक्षा का अभाव बना रहा। बवाल होने पर पुलिस भी असहाय दिखाई देती है। 2018 में गूलर रोड पर पहुंच गए।- विवेक वार्ष्णेय , गूलर रोड
असुरक्षित माहौल के कारण परिवार और कारोबार दोनों प्रभावित हो रहे थे। इसलिए बाबरी मंडी क्षेत्र को 2020 में छोड़ दिया।- अनुज गुप्ता, मथुरा रोड