रामघाट रोड पर जब आबादी विरल थी और चंदनिया वाली गली में किराये के छोटे से भवन में पुलिस चौकी चलती थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही क्वार्सी आगे चलकर जिले का सबसे व्यस्त थाना बनेगा।
चार दशक में शहर फैला, कॉलोनियां बसीं, कारोबार बढ़ा और इसके साथ अपराधों का दबाव भी लगातार बढ़ता गया। हालत यह है कि महुआखेड़ा थाना अलग होने के बाद भी क्वार्सी सबसे ज्यादा आबादी और अपराध वाला थाना बना हुआ है। अभिषेक शर्मा की ‘थाना डायरी’ में पढ़िए क्वार्सी थाने के इतिहास, बदलते अपराध ट्रेंड और उसके बढ़ते दबाव की कहानी।
तीन थाने वाला शहर था अलीगढ़
कोतवाली, बन्नादेवी और सिविल लाइंस थाने के दायरे में सिमटा अलीगढ़ शहर समय के साथ बहुत फैला है। एक दौर था, जब रामघाट रोड पर निरंजनपुरी-नवादा से आगे आबादी न थी। फिर सीधे गांव क्वार्सी की आबादी थी। उस वक्त प्रकाश लॉज में आयोजित होने वाले किसी शादी समारोह या दावत में आने से पहले लोग सौ बार सोचते थे। अब ये लॉज जमींदोज हो चुका है। सुरक्षा के लिहाज से क्वार्सी चौकी गांधीआई परिसर में किराये पर चंदनिया वाली गली में संचालित होती थी, जबकि क्वार्सी फार्म के बाहर गुमटी में रामघाट रोड चौकी थी। जब शहर रामघाट रोड पर सबसे अधिक बढ़ने लगा। आबादी बसने लगी तो जरूरत महसूस हुई थाने की। यही समय था जब क्वार्सी चौकी को एक थाने का दर्जा प्राप्त हुआ।
बेहतर काम या अपराध का कलंक
अब बारी आई क्वार्सी थाने का रिकार्ड बनाने की जिसमें रामघाट रोड पर प्रापर्टी कारोबार बढ़ने पर प्रापर्टी विवाद यहां का सबसे बड़ा रिकार्ड बना। आबादी बढ़ने पर छोटे झगड़े, चोरी, राहजनी व हत्या जैसे अपराध भी होने लगे। कुल मिलाकर दो दशक पहले क्वार्सी थाना जिले का सबसे बड़ी आबादी व अपराध वाला थाना बन गया। जरूरत के अनुसार यहां स्टाफ बढ़ाया गया, चौकियां बढ़ाई गईं। चार वर्ष पहले क्वार्सी की चौकी महुआ खेड़ा को काटकर 33 गांव-मोहल्ले जोड़कर नया थाना बना दिया। मगर क्वार्सी के नाम दर्ज रिकार्ड कम नहीं हुआ। पुलिस का एक पक्ष मानता है कि थाने की सक्रियता बढ़ने से आंकड़े भी बढ़े हैं जबकि एक पक्ष इसे अपराध का कलंक भी मानता है जिसे मिटाने के लिए हर थाना प्रभारी प्रयास कर चुका है।
बदला अपराध का ट्रैंड, बीपी रोगी हुए थानेदार
इस थाने में शुरुआत प्रापर्टी अपराध से हुई। फिर लूट, चोरी, डकैती व हत्या जैसे संगीन अपराधों का दौर भी नई आबादी में सर्वाधिक हुआ। एक दौर ऐसा भी आया कि दिन में आठ आठ छिनैतियां इस थाना क्षेत्र में एक दशक पहले दर्ज की गईं। इस अपराध ने यहां के थानेदारों को उच्च रक्तचाप तक का रोगी बनाया। कई ने खुद थाना छोड़ने की अर्जी दी। फिर गैंगवार सरीखा अपराध इस थाने का सिरदर्द बना जो आज भी कायम है। इसके अलावा प्रापर्टी विवाद घटा है। मगर चोरी, छिनैती, हत्या व प्रापर्टी से जुड़े झगड़े आज इस थाने का अपराध ट्रैंड है। मगर जिले का कोई दूसरा थाना इस थाने का रिकार्ड कम नहीं कर पाया।
. जिले में क्वार्सी थाना सहित कुछ थाने बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। क्वार्सी का सबसे बड़ा कारण इस इलाके की आबादी है। जरूरत के अनुसार यहां इंस्पेक्टर सहित कुल 200 दरोगा, सिपाही, महिला सिपाही तैनात हैं। समय के साथ अपराध ट्रैंड बदल रहा है। ओवरऑल अपराध में कमी है लेकिन कुछ अपराध ऐसे हैं जो आबादी के चलते कम नहीं हो पा रहे। -नीरज जादौन, एसएसपी
क्वार्सी थाने का क्राइम रिकार्ड
-वर्ष 2023 में कुल 1338 अपराध दर्ज हुए
-वर्ष 2024 में कुल 1130 अपराध दर्ज हुए
-वर्ष 2025 में कुल 1281 अपराध दर्ज हुए
-ये अनुपात भी समझिये-
-1000 से ऊपर अपराध वाला जिले में अकेला क्वार्सी थाना है बरकरार
-15000 औसत अपराध 30 थानों में होते दर्ज, जिनमें क्वार्सी नंबर वन
-20 मई तक पिछले वर्ष 439 व इस वर्ष 425 अपराध किए गए हैं दर्ज
-3 लाख की सर्वाधिक आबादी जिले में क्वार्सी थाने में आज भी रहती है
ये है इतिहास
-1984 में क्वार्सी चौकी को थाने का दर्ज दिया गया
-1996 के आसपास थाना सरकारी भवन में पहुंच है
-2021 में क्वार्सी को काटकर महुआ खेड़ा थाना बना