बबराला बागऊ के पांच वर्षीय भवनेश पुत्र अमर सिंह को जेएन मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के जेबी पंत अस्पताल में रेफर कर दिया गया। नन्हें बच्चे के परिजनों से कहा गया कि यहां जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल है। इमरजेंसी के बाहर भवनेश को गोद में लेकर अमर सिंह इस चिंता में परिजनों को फोन लगा रहे थे कि अब क्या करें। अलीगढ़ से लेकर दिल्ली कैसे जाएं और वहां उपचार कैसे कराएं।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर सातवें वेतनमान की मांग को लेकर पिछले पांच दिन से हड़ताल (सामूहिक अवकाश) पर हैं। इसकी वजह से इमरजेंसी सेवाएं बाधित है। हड़ताल का हवाला देकर गंभीर मरीजों को दूसरी जगह जाने को कहा जा रहा है। करीब 20 दिन पहले भवनेश छत से गिरकर घायल हुआ था।
उसके हाथ का घाव अब बिकराल रूप धारण कर चुका है। इसी तरह टीकू मंसदगढ़ी के कृष्ण दो दिन से इमरजेंसी एवं ओपीडी में जाकर इलाज का प्रयास कर रहे हैं। उनके पैर में फ्रैक्चर है और घाव गंभीर रूप धारण करते जा रहा है।
कई मरीजों को आज भी इमरजेंसी से वापस लौटा दिया गया। हृदय घात के दो मरीजों को देखकर ओपीडी में भेज दिया गया। कुछ अन्य मरीजों को भी प्राथमिक उपचार दिया गया।
उपचार के दौरान बीती रात सोनू नामक एक महिला की मृत्यु हो गई। हड़ताल के दौरान मरने वालों की संख्या 16 से अधिक पहुंच गई है। हालांकि चिकित्सक इसे हड़ताल से जोड़कर नहीं देख रहे हैं।
उपचार के अभाव में बाहर कितने लोग अकाल काल की गाल में समा गए, इसका हिसाब किसी के पास नहीं है। पांच दिन से हड़ताल एवं मरीजों को उपचार नहीं मिलने के कारण शुक्रवार को इमरजेंसी में अन्य दिनों की तुलना में बहुत कम मरीज पहुंचे। इमरजेंसी में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा।