मामले में एक बड़ा सवाल यह भी सामने आ रहा है कि इस गबन का शोर 2021 में मचा। उसी समय शासन के निर्देश पर जांच शुरू हुई। लेकिन जांच में विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ 2003 से 2013 तक के गबन की जांच की। उसमें भी 2007 से 2011 तक के बिल, पर्चे व रजिस्टर से कागज गायब मिले। ऐसे में सवाल है कि 2013 के बाद 2021 तक की जांच किस वजह से नहीं की गई। विभाग के अंदर के लोग दावा करते हैं कि गबन 2021 तक जारी रहा। ऐसे में अगर इस अवधि की गबन की राशि को जोड़ा जाए तो रकम 5 करोड़ से कई गुना अधिक होगी।
जांच की जद में आएंगे अन्य अधिकारी भी
विभागीय सूत्रों का दावा है कि बेशक 2013 के बाद की अवधि की गबन की जांच नहीं हुई। लेकिन, शासन स्तर पर इस बात का शोर है कि 2013 के बाद से 2021 तक के अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। उन सभी पर भी आरोप पत्र जारी किया जाएगा। यह काम भी जल्द होगा। इस अवधि में भी अधिकारियों को गबन का जवाब देना होगा।
ये है प्रकरण
अलीगढ़ जिले में 2003 से 2013 तक 520 शिक्षकों के डमी खाते खोले गए। इसके बाद उनमें चार करोड़ 92 लाख 39 हजार 749 रुपये का लेनदेन किया। मामले में इस अवधि में तैनात रहे 11 बीएसए, 30 बीईओ, 10 वित्त अधिकारी समेत 61 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।