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GPF scam: 520 खातों में ट्रांसफर हुई गबन की रकम, 2013 से 2021 तक के अधिकारी आएंगे जांच के दायरे में

Sun, 23 Mar 2025 11:08 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मामले में एक बड़ा सवाल है कि इस गबन का शोर 2021 में मचा। शासन के निर्देश पर जांच शुरू हुई। लेकिन जांच में विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ 2003 से 2013 तक के गबन की जांच की। उसमें भी 2007 से 2011 तक के बिल, पर्चे व रजिस्टर से कागज गायब मिले। ऐसे में सवाल है कि 2013 के बाद 2021 तक की जांच किस वजह से नहीं की गई।
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घोटाला सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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अलीगढ़ के बेसिक शिक्षा विभाग में जीपीएफ की 4.92 करोड़ की रकम 520 छद्म खातों में ट्रांसफर की गई। शोर मचा तो विभागीय जांच कर रिपोर्ट भेज दी गई। मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया। लेकिन, यह सवाल आज भी अनुत्तरित हैं कि आखिर ये खाते किन लोगों के थे, जिनमें ये रकम ट्रांसफर की गई। मामले में 2021 तक यहां तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्न चिह्न उठ रहे हैं।

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इस गबन को लेकर 2021 में शोर मचा था। इसके बाद शासन के आदेश पर जांच शुरू हुई। जांच के आधार पर वर्ष 2003 से 2013 तक के अधिकारियों, कर्मचारियों व वित्त अधिकारियों को दोषी ठहरा दिया गया। अब मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया। लेकिन, अब तक ये साफ नहीं हुआ कि जिन छद्म नाम के 520 खातों में रकम ट्रांसफर की गई, वे किसके थे। किन लोगों ने वे खाते खुलवाए। उनका विभाग से या विभाग के किन-किन अधिकारियों से नाता रहा। इस विषय पर अधिकारी कुछ भी बोलने को राजी नहीं हैं।

यह विषय अब शासन स्तर से देखा जा रहा है। हमने मुकदमा दर्ज करा दिया है। राज्य स्तर की एजेंसी जांच करेगी। इसलिए अब ज्यादा टीका टिप्पणी उचित नहीं। जांच में जो भी मदद मांगी जाएगी, उसमें मदद की जाएगी। - डॉ. राकेश कुमार सिंह, बीएसए
इस मामले में बहुत से ऐसे तथ्य हैं, जिनको नजरअंदाज किया जा रहा है। इसलिए हमारी मांग है कि मामले में जांच सीबीआई स्तर से होनी चाहिए। - प्रशांत शर्मा, जिलाध्यक्ष जूनियर शिक्षक संघ

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गबन 2021 तक चला, जांच 2013 तक

मामले में एक बड़ा सवाल यह भी सामने आ रहा है कि इस गबन का शोर 2021 में मचा। उसी समय शासन के निर्देश पर जांच शुरू हुई। लेकिन जांच में विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ 2003 से 2013 तक के गबन की जांच की। उसमें भी 2007 से 2011 तक के बिल, पर्चे व रजिस्टर से कागज गायब मिले। ऐसे में सवाल है कि 2013 के बाद 2021 तक की जांच किस वजह से नहीं की गई। विभाग के अंदर के लोग दावा करते हैं कि गबन 2021 तक जारी रहा। ऐसे में अगर इस अवधि की गबन की राशि को जोड़ा जाए तो रकम 5 करोड़ से कई गुना अधिक होगी।

जांच की जद में आएंगे अन्य अधिकारी भी
विभागीय सूत्रों का दावा है कि बेशक 2013 के बाद की अवधि की गबन की जांच नहीं हुई। लेकिन, शासन स्तर पर इस बात का शोर है कि 2013 के बाद से 2021 तक के अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। उन सभी पर भी आरोप पत्र जारी किया जाएगा। यह काम भी जल्द होगा। इस अवधि में भी अधिकारियों को गबन का जवाब देना होगा।

ये है प्रकरण
अलीगढ़ जिले में 2003 से 2013 तक 520 शिक्षकों के डमी खाते खोले गए। इसके बाद उनमें चार करोड़ 92 लाख 39 हजार 749 रुपये का लेनदेन किया। मामले में इस अवधि में तैनात रहे 11 बीएसए, 30 बीईओ, 10 वित्त अधिकारी समेत 61 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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