ईदुल अजहा पर जो साहिबे निसाब यानी मालदार हैं, उन पर कुर्बानी वाजिब है। शहर मुफ्ती ने कुर्बानी किए गए जानवरों के अवशेष को इधर-उधर न फेंकने की अपील की है। मौलाना सैयद अतीकुर्रहीम ने कहा कि ईदुल अजहा पर कुर्बानी देना वाजिब है। साहिबे निसाब होते हुए भी किसी शख्स ने कुर्बानी नहीं दी तो वह गुनहगार होगा। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के लिए कोई महंगे जानवर जरूरी नहीं है, बल्कि वह बड़े जानवरों में हिस्सा भी ले सकते हैं। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाना चाहिए। एक हिस्सा गरीबों में, दूसरा हिस्सा दोस्त-रिश्तेदारों में और तीसरा हिस्सा अपने लिए रखना चाहिए।
बाजारों में देर रात होती रही खरीदारी
ईदुल अजहा पर बाजारों में रौनक रही। देर रात तक खरीदारी होती रही। नमाज को लेकर कुर्ता, पायजामा और टोपी की खरीदारी की गई। इत्र भी खरीदे गए। ऊपरकोट, सिविल लाइंस, जीवनगढ़, मेडिकल रोड, सिविल लाइंस सहित मुस्लिम बहुल क्षेत्र के बाजारों में लोगों ने अपनी जरूरतों के मुताबिक खरीदारी की।