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ईद खुदा का उपहार, मिलजुल कर मनाएं त्योहार: मुफ्ती

Thu, 06 Jun 2019 01:34 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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ईद की नमाज अदा करते नमाजी। - फोटो : Rupesh
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जिले की सभी मस्जिदों में ईद की नमाज बुधवार को पूरे एहतराम के साथ अदा की गई। मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगी गई। हिंदू मुस्लिम भाई चारे पर जोर दिया गया। तरक्की और खुशहाली के साथ गरीबों की मदद करने की ताकीद की गई, ताकि सभी चैन से जिंदगी गुजार सकें। 
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  शाहजमाल ईदगाह में शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने बेहद रुहानी तकरीर की और लोगों को इस्लाम के फर्ज याद दिलाए। उन्होंने पांच वक्त की नमाज, जुमा, रमजान, तराबी, जकात और ईद के साथ हज के बारे में फरमाया कि यह हर मुसलमान के लिए जरूरी है। ईद खुदा का तोहफा है। शहर मुफ्ती ने कहा कि हिंदू मुसलिम सभी मिल जुल कर रहें। एक दूसरे का साथ निभाएं। जिससे देश में तरक्की का माहौल रहे और हिंदुस्तान का नाम दुनिया में रोशन रहे। मुल्क से बढ़ कर कुछ नहीं। मुल्क है तो हम सबका वजूद है। इसकी आन बान शान हम सबका फर्ज है। ऊपरकोट जामा मस्जिद में इमाम कारी सागिल ने ईद की नमाज अदा कराई।


नमाज से पहले रस्मन तीन गोले छोड़े गए। पहला साढ़े छह दूसरा पौने सात और तीसरा सात बजे। सात बज कर छह मिनट पर नमाज शुरू हुई और 7.18 बजे खत्म हो गई। इसके बाद दुआ हुई। यासीन पेंटर ने रमजान और ईद में व्यवस्थाओं और अमनोअमान कायम रखने पर जिला प्रशासन की सराहना की। ईदगाह कमेटी के हाजी सिराजुद्दीन, दुलारे नबी, मौलाना इरफान, अब्दुल हफीज अंसारी, इबादुर रहमान, फरहत उल्लाह खां, मुबीन कुरैशी, गुलजार अहमद सहित सभी सदस्यों ने नमाज की व्यवस्थाएं संभालने में खासा योगदान किया। 
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मुझे ईदगाह में दफन न करना : शहर मुफ्ती
 शहर मुफ्ती ने जज्बाती लहजे में रुंधे हुए गले से कहा कि उनकी ऐसी कोई हसरत नहीं है कि उनको शाहजमाल ईदगाह में सुर्पुद ए खाक किया जाए, क्योंकि यहां पहले से ही दो कब्रें मौजूद हैं। जिसमें पहली शहर मुफ्ती अहमद उल्लाह की है और दूसरी उनके वालिद शहर मुफ्ती अब्दुल्ला कयूम की है जिनका इंतकाल 11 सितंबर 2010 में हुआ था। अब यहां पर और कब्रें न बनाई जाएं। ईदगाह को ईदगाह ही रहने दिया जाए।


अगर यहां कब्रें बनती रहीं तो ईदगाह की जगह कम पड़ेगी। शहर मुफ्ती यहीं पर नहीं रुके। आगे बोले कि उनको पास में ही शम्सुल आरफीन कब्रिस्तान में दफनाया जाए, लेकिन वहां भी कोई खास इंतजामत न किए जाए। एक आम शख्स की तरह ही उनको दफन किया। सभी लोग इसका पूरा ख्याल रखें। शहर मुफ्ती बोले.. ये अलन-एलान उनका वसीयतनामा है, जिसे हर हाल में माना जाए। इसमें चाहने वाले अपनी ख्वाहिश न जोड़ें।
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