कोरोना वायरस का खौफ इस समय सभी के सिर चढ़कर बोल रहा है। इस वायरस की दहशत का सबसे ज्यादा असर अंडे, मीट एवं चिकन पर पड़ा है। अकेले अंडे के कारोबार में ही पिछले करीब 20 दिन में दस से पंद्रह करोड़ का घाटा हुआ है। बीमारी की आशंका से लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। जो होटल रेस्टोरेंट एवं ढाबों पर जा भी रहे हैं तो वे मीट, मांस, अंडा आदि से बने व्यंजनों से परहेज कर रहे हैं। इससे होटल इंडस्ट्री को भी खासा झटका लगा है। इनका भी कारोबार आधा रह गया है।
नानवेज का विकल्प बना कटहल व मशरूम
सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कमेंट एवं अफवाहों के चलते मीट, चिकन व अंडे से बने व्यंजनों की बिक्री जैसे जैसे घट रही है, वैसे वैसे कटहल एवं मशरूम की मांग बढ़ रही है। लोग इसे चिकन आदि के विकल्प के रूप में पसंद कर रहे हैं। इसका असर इन सब्जियों की बिक्री पर पड़ा है। इनकी बिक्री में डेढ़ से दोगुना तक इजाफा हुआ है।
अंडा कारोबारी खुसरो खान का कहना है कि कोरोना की अफवाहों का सबसे ज्यादा असर अंडे, मीट, चिकन आदि पर पड़ा है। पिछले 20 दिनों में अकेले अंडे की बिक्री आधे से भी कम रह गई है। इस बीमारी से पहले रोजाना अंडों के हब अलीगढ़ से प्रतिदिन दस लाख अंडे हाथरस, कासगंज, एटा एवं आसपास के जनपदों में जाते थे। कोरोना के बाद बिक्री आधी रह गई है। ऊपर से अंडे के थोक के रेट भी चार रुपये से गिरकर मात्र 2 से सवा दो रुपये तक रह गए हैं। इस कारोबार में करीब 10 से 15 करोड़ का घाट हुआ है।
रात 12 बजे से ही सन्नाटा पसर जाता है
होटल एंबेसी के संचालक कल्लू भाई का कहना है कि कोरोना वायरस का खौफ होटल एवं रेस्टोरेंट इंडस्ट्रीज पर हावी है। ग्राहक कम ही आ रहे हैं। जो आ रहे हैं वे अंडे, मीट, चिकन आदि के बजाय कटहल एवं मशरूम आदि से बने व्यंजन ही पसंद कर रहे हैं। पहले मेरे होटल में रात दो से ढाई बजे तक ग्राहकों की भीड़ रहती थी, लेकिन अब तो c। कारोबार भी पिछले 15 से 20 दिन में आधा रह गया है। यदि कुछ समय ऐसा ही चला तो छोटे कारोबारियों को तो कुछ समय के लिए होटल आदि बंद करने पड़ेंगे।
सब्जी मंडी कारोबारी कल्लू ने बताया कि कोरोना वायरस के बारे में तरह तरह की चर्चाओं ने हालांकि सब्जियों के कारोबार पर भी असर डाला है, लेकिन कम मात्रा में बिकने वाली सब्जियां कटहल एवं मशरूम की बिक्री में एकाएक इजाफा हुआ है। पहले मशरूम मात्र सहालग के समय मांग पर ही मंगाई जाती थी, लेकिन अब आम दिनों में भी उसकी डिमांड हो रही है। कटहल के मामले में भी कमोबेश ऐसा ही है। विशेष रूप से होटल व रेस्टोरेंट कारोबारी बल्क में इन सब्जियों को मंगा रहे हैं।